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गोविंदाचार्य ने चुनाव आयोग से कहा - राजनीतिक दलों को चंदे में मिली कर छूट पर रोक लगाई जाए

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गोविंदाचार्य ने चुनाव आयोग से कहा - राजनीतिक दलों को चंदे में मिली कर छूट पर रोक लगाई जाए

राजनीतिक चिंतक गोविंदाचार्य

नई दिल्ली:

विमुद्रीकरण में राजनीतिक दलों को मिल रही बेवजह छूट पर रोक लगाने की मांग लेकर पूर्व भाजपा नेता और राजनीतिक चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने चुनाव आयोग के आयुक्तों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा.

अपने मांगपत्र में गोविंदाचार्य ने कहा कि बीते 8 नवंबर से नोटबंदी के बाद राजनीतिक दलों के खातों से आर्थिक लेन-देन में वित्त मंत्रालय, आयकर विभाग सहित बैकिंग नियमों की अनदेखी की जा रही है.

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नए कानून बनाने के नाम पर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को नोटबंदी के दायरे से बाहर करने की कोशिश कर रहा है जिसको रोकने के लिए हमने मौजूदा कानून के पालन की जरूरत बताया है। ज्ञापन के अनुसार -

  1. राजनीतिक दल 8 नवंबर के बाद 12.5 लाख रुपये से अधिक नगदी चंदा बंद किए हुए नोटों से नहीं ले सकते. जिसके बारे में वित्त मंत्रालय द्वारा 15 नवंबर को जारी आदेश लागू हुआ.
  2. चुनाव आयोग द्वारा नवंबर 2014 में जारी आदेश के अनुसार राजनीतिक दल 10 दिनों से अधिक कैश-इन-हैंड नहीं रख सकते इसलिए 18 नवंबर के बाद दलों के खाते में पुराने नोटों का डिपोजिट की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए.
  3. 20,000 रुपये से ऊपर किसी भी नकद जमा पर आयकर छूट का लाभ तब तक नहीं मिले जब तक दानदाताओं का विवरण न दिया जाए.
  4. ई-वेतन तथा ई-पेमेंट पर लकी ड्रॉ तथा इंसेनटिव देने के लिए कानून लाने वाली सरकार दलों के ई-डोनेशन का कानून बनाए जिसके बगैर उन्हें आयकर की छूट न मिले.

राजनीतिक दलों पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए गोविंदाचार्य ने अपने ज्ञापन में कहा कि विमुद्रीकरण में राजनीतिक दलों को विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के आदेशों के इतर मिल रहे फायदों पर चुनाव आयोग कार्रवाई करे. गोविंदाचार्य का दावा है कि इस मांग पर उन्हें चुनाव आयोग की तरफ से सकारात्मक आश्वासन मिला है.

गोविंदाचार्य की मांग है कि राजनीतिक दलों के खाते, जिनमें 12.5 लाख रुपये से अधिक धन जमा हुआ, उनकी आयकर जांच होनी चाहिए और अतिरिक्त राशि पर कर वसूला जाना चाहिए. उनकी मांग है कि चुनाव आयोग को इस बारे में रिजर्व बैंक और आयकर विभाग को निर्देश जारी करना चाहिए. साथ ही आयोग को इस मामले में राजनीतिक दलों पर कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि वह राजनीतिक दलों के लिए नियामक की भूमिका निभाता है. उन्होंने चुनाव आयोग के सामने बोगस राजनीतिक दलों को भी अपंजीकृत करने का मसला भी उठाया.



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