दलितों पर अत्यचार बढ़े, बीजेपी के दलित सांसद खुलकर जता रहे असंतोष

उदित राज, सावित्री बाई फूले, अशोक कुमार दोहरे, छोटे लाल और यशवंत सिंह ने सवाल खड़े किए

दलितों पर अत्यचार बढ़े, बीजेपी के दलित सांसद खुलकर जता रहे असंतोष

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  • यूपी में 2015 में 8357 मामले और 2016 में 10426 मामले
  • बीजेपी ने कहा, दलितों के खिलाफ अपराध सही तरीके से रिकार्ड होने लगे
  • तीन अहम राज्यों में दलितों के खिलाफ अपराध में गिरावट
नई दिल्ली:

एससी-एसटी ऐक्ट में ढिलाई के बाद चले हंगामे के बीच सरकार ख़ुद मानती है कि दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं. इस बीच बीजेपी के दलित सांसद खुल कर अपना असंतोष जता रहे हैं.

उदित राज, सावित्री बाई फूले, अशोक कुमार दोहरे, छोटे लाल और यशवंत सिंह...बीजेपी के इन पांच सांसदों ने बीते दिनों में दलितों को लेकर अपनी ही सरकार के रवैये पर सवाल खड़े किए. इसकी ठोस वजह भी है. उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं. इस साल 6 फरवरी को गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में कहा कि यूपी में 2015 में दलितों से अपराध के 8357 मामले दर्ज हुए जबकि 2016 में 10426 (24.75% बढ़ोतरी) हुए.

राष्ट्रीय एससी-एसटी कमीशन के पूर्व चेयरमैन और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने एनडीटीवी से कहा, "हमारे कार्यकाल में दलितों के खिलाफ अपराध सही तरीके से रिकार्ड किया जाने लगा है...राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग की तरफ से सभी राज्यों से कहा गया है कि वो दलितों के खिलाफ अपराध की घटनाओं को रजिस्टर करें."

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हालांकि गृह मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक 2015 से 2016 के बीच तीन अहम राज्यों में दलितों के खिलाफ अपराध में गिरावट दर्ज हुए हैं. बिहार में 2015 में कुल 6367 मामले दर्ज़ किए गए थे जो 2016 में घटकर 5701 रह गए. यानी 10.46% की गिरावट. यही हाल राजस्थान का रहा, जहां 2015 में दलितों के खिलाफ अत्याचार के 5911 मामले रजिस्टर्ड किए गए थे जो 2016 में 13.44% गिरकर 5134 हो गए. जबकि महाराष्ट्र में 2015 में 1804 ऐसे अत्याचार के मामले दर्ज़ हुए जो 2016 में 2.99% गिरकर 1750 हो गए. तो 2016 में दलित समुदाय के खिलाफ अपराध के 40,801 मामले दर्ज किए गए और दलितों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखता रहा.

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कांग्रेस नेता संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार दलितों के खिलाफ अपराध को रोकने में नाकाम रही है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलितों के हमदर्द बनने का दावा करते हैं, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि अपने समाज के सबसे पिछड़े समुदाय को लेकर हमारे लोकतंत्र की चुनौतियां अभी बाक़ी हैं.