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20,250 मनोचिकित्सकों की तुलना में महज 898 मनोचिकित्सक : सरकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कल सदन को सूचित किया कि जनवरी 2015 तक देश में 13,500 मनोचिकित्सकों की आवश्यकता थी,

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20,250 मनोचिकित्सकों की तुलना में महज 898 मनोचिकित्सक : सरकार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: देश में मनोचिकित्सकों की भारी कमी है. लोकसभा को यह सूचित किया गया कि देश में 20,250 मनोचिकित्सकों की आवश्यकता है लेकिन इनकी संख्या महज 898 है. इसके साथ ही 37,000 मनोचिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ताओं की जरूरत की तुलना में 900 से भी कम मनोचिकित्सक सामाजिक कार्यकर्ता हैं.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कल सदन को सूचित किया कि जनवरी 2015 तक देश में 13,500 मनोचिकित्सकों की आवश्यकता थी, लेकिन इनकी संख्या महज 3,827 थी. भारत में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी पर पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वर्तमान में 3,000 मनोचिकित्सा नर्सेां की आवश्यकता है लेकिन इनकी संख्या सिर्फ 1,500 है. 

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देशभर में 7.22 लाख से अधिक लोग ‘मानसिक बीमारी’ से ग्रसित थे जबकि 15 लाख से अधिक लोगों में ‘बौद्धिक अक्षमता’ थी. देश में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में 76,603 लोग किसी न किसी प्रकार के मनोरोग से ग्रसित हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल में 71,515, केरल में 66,915 और महाराष्ट्र में 58,753 लोग मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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