मैंने अहमद पटेल को नहीं दिया वोट, कांग्रेस को वोट देने का मतलब नहीं : शंकर सिंह वाघेला

क्या आप अहमद पटेल का समर्थन करेंगे के सवाल पर उन्होंने कहा था कि हर वोटर अपने ख़ुद के वोट का मालिक होता है. अहमद भाई पटेल से मेरे अच्छे संबंध हैं, मैंने उनसे चर्चा की है.

मैंने अहमद पटेल को नहीं दिया वोट, कांग्रेस को वोट देने का मतलब नहीं : शंकर सिंह वाघेला

शंकर सिंह वाघेला ने कहा- कांग्रेस को वोट नहीं किया

खास बातें

  • कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं : शंकर सिंह वाघेला
  • हर वोटर खुद के वोट का मालिक होता है
  • अहमद पटेल से मेरे मधुर संबंध हैं
अहमदाबाद:

गुजरात राज्यसभा चुनाव को लेकर शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि मैंने अहमद पटेल को वोट नहीं दिया. कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुझे अहमद पटेल को वोट न देने का अफसोस है. इससे पूर्व हाल ही में कांग्रेस का दामन छोड़ने वाले वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल के समर्थन को लेकर सोमवार को भी पत्ते साफ़ नहीं किए थे. NDTV के श्रीनिवासन जैन से बातचीत में उन्होंने माना था कि अहमद पटेल से उनके काफी पुराने और अच्छे संबंध हैं, लेकिन उनको समर्थन देने के सवाल को वाघेला टाल गए थे. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया था कि क्या करना है, इस पर उन्होंने अपना मन बना लिया है. 

पढ़ें: गुजरात के सीएम विजय रुपानी बोले- गुजरात से राज्यसभा की तीनों सीटें हम ही जीतेंगे

Newsbeep

क्या आप अहमद पटेल का समर्थन करेंगे के सवाल पर उन्होंने कहा था कि हर वोटर अपने ख़ुद के वोट का मालिक होता है. अहमद भाई पटेल से मेरे अच्छे संबंध हैं, मैंने उनसे चर्चा की है. इसलिए क्या करना है और क्या नहीं करना है ये मेरे और अहमद पटेल का आपसी मामला है. ये मेरी निजी सोच है, मेरा निजी फ़ैसला है. किसे वोट करना है, किसे नहीं करना है ये कोई सवाल नहीं है. ऐसा कुछ नहीं है कि मुझे आख़िरी वक़्त में फ़ैसला लेना है. मैंने पहले ही अपना मन बना लिया है.

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


अहमद पटेल के साथ आपके क्या समीकरण हैं के सवाल पर वह बोले- 1977 में जब मैं जनता पार्टी के हिस्से से लोकसभा सांसद चुना गया तब अहमद भाई कांग्रेस से जुड़े हुए थे. तब से ही हम अच्छे दोस्त हैं. मैं उनके घर भी आया-जाया करता था. आज भी हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. आज सुबह भी हमने फ़ोन पर चर्चा की. कल भी वो मुझे फ़ोन करेंगे. 8 तारीख़ के बाद भी हम एक-दूसरे से मिलेंगे. इसलिए कोई दिक़्क़त नहीं है. हमारा रिश्ता राजनीतिक दल से अलग है.