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नरोदा पाटिया नरसंहार : मोदी की पूर्व मंत्री माया कोडनानी समेत 32 दोषी करार

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खास बातें

  1. गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान नरोदा पाटिया में एक ही समुदाय के 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
अहमदाबाद:

नरोदा पटिया दंगों में अल्पसंख्यक समुदाय के 97 लोगों के मारे जाने की घटना के 10 साल बाद एक विशेष अदालत ने बीजेपी विधायक और नरेंद्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी तथा बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत 32 अभियुक्तों को हत्या और साजिश रचने का दोषी ठहराया।

अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश ज्योत्सना याज्ञनिक ने गोधरा दंगा कांड के बाद भड़के इन दंगों में कोडनानी तथा बाबू बजरंगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) तथा धारा-302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने इस मामले में 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया।

पीड़ितों के वकील शमशाद पठान ने कहा, आपराधिक साजिश तथा हत्या के आरोपों में अधिकतम मौत की सजा हो सकती है। इस मामले में अदालत 31 तारीख को अभियुक्तों को सजा सुनाएगी।

यह घटना 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के एक दिन बाद हुई थी। विश्व हिन्दू परिषद ने 28 फरवरी, 2002 को बंद का आह्वान किया था। इसी दौरान नरोदा पटिया इलाके में उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था। इस घटना में 97 लोगों की मौत हो गई थी और 33 अन्य घायल हो गए थे।


इस मामले की सुनवाई अगस्त, 2009 में शुरू हुई और अदालत ने 62 आरोपियों के खिलाफ अभियोग निर्धारित किए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी विजय शेट्टी की मौत हो गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें चश्मदीद गवाह, पीड़ित, डॉक्टर, पुलिसकर्मी, सरकारी अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, आशीष खेतान तथा कई पत्रकार भी शामिल थे। खेतान ने आरोपियों के संबंध में एक स्टिंग ऑपरेशन चलाया था।

गुजरात पुलिस ने शुरू में इस मामले में 46 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था। इसकी जांच 2008 में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच समिति को को सौंपी गई। इसके बाद 24 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। कुल मिलाकर मामले में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने और अभियोग निर्धारण की प्रक्रिया से पूर्व ही छह आरोपियो की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य आरोपी मोहन नेपाली तथा तेजस पाठक जमानत पर रिहा होने के बाद से फरार हैं।

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कोडनानी को एसआईटी ने उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह मार्च, 2009 में मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री थीं। इस घटना के समय वह विधायक थीं। पिछले करीब एक दशक में नरोदा पटिया मामले की जांच आठ जांच अधिकारियों ने की। इस समय हिमांशु शुक्ला एसआईटी टीम की ओर से इस मामले के जांच प्रभारी हैं।

यह मामला गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों में से एक है, जिनकी जांच एसआईटी ने की है। इनमें गोधरा ट्रेन कांड भी शामिल था। पिछले साल एक विशेष अदालत ने गोधरा ट्रेन कांड में 11 लोगों को मौत की सजा तथा 20 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले में गोधरा रेलवे स्टेशन के समीप साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एस-6 कोच में लगी आग में 59 लोग जिंदा जल गए थे।



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