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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बचेगी एक बलात्कार पीड़ि‍ता की ज़िंदगी, डॉक्‍टर करेंगे गर्भपात

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बचेगी एक बलात्कार पीड़ि‍ता की ज़िंदगी, डॉक्‍टर करेंगे गर्भपात

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो

अहमदाबाद:

14 साल की इस बच्ची की ज़िंदगी छह महीने तक एक बड़े नाजुक मोड़ पर ठिठकी रही। लेकिन अब एक उम्मीद पैदा हुई है। शुक्रवार की सुबह अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और एक प्राइवेट डॉक्टर ऋद्धि शुक्ला की टीम उसके भीतर पल रहा एक अनचाहा गर्भ निकाल लेगी। हालांकि ये आसान फ़ैसला नहीं था।

ये मामला सबरकांठा ज़िले के हिम्मतनगर का है। छह महीने पहले ये बच्ची बीमार पड़ी तो इलाज के लिए एक डॉक्टर जतिन मेहता के पास गई। डॉक्टर ने टायफायड का इलाज करने के बहाने उसे बेहोश करके उसके साथ बलात्कार किया। परिवार को पहले तो पता ही नहीं चला, जब लड़की गर्भवती हो गई और गर्भ करीब 4 महिने का हो गया तब परिवार को पता चला।

ज़िम्मेदार डॉक्टर के साथ परिवार का झगड़ा हुआ, पुलिस में रिपोर्ट के बाद डॉक्टर को गिरफ़्तार कर लिया गया। लेकिन बच्ची की मुश्किलों का अंत नहीं हुआ। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि लड़की का परिवार इतना निराश हो गया था कि उन्होंने गांव छोड़ देने का फैसला कर लिया था। काफी समझाने बुझाने के बाद ये तय हुआ कि कानून का दरवाजा खटखटाया जाय और न्याय की गुहार लगाई जाय।


परिवार बेहद हताश था। लड़की स्कूल नहीं जा पा रही थी। समाज में उठना-बैठना आसान नहीं रह गया था। परिवार ने अदालत का सहारा लिया। यहां भी मुश्किल आई। सेशंस कोर्ट ने गर्भपात की अर्ज़ी नामंज़ूर कर दी। हाइकोर्ट में भी ये अर्ज़ी ठुकरा दी गई।

क्योंकि कानूनन 20 सप्ताह से ऊपर के गर्भ को हटाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। तब एक वकील आनंद याज्ञिक के ज़रिए परिवार मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गया। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील कामिनी जयसवाल ने तुरन्त ये मामला उठाने की गुहार की। सुप्रीम कोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुये तुरंत उठाने को तैयार हुआ और सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि डॉक्टरों की एक टीम बनाई जाए जिसमें डॉ. ऋद्धि शुक्ला के अलावा सिविल अस्पताल के तीन गाइनोकोलॉजिस्ट हों, एक क्लिनिकल साइकिएट्रिस्ट हो और वो जांच कर अंतिम फैसला करें।

डॉक्‍टर ऋद्धि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से पहले ही जांच कर रिपोर्ट दी थी कि लड़की इसकी वजह से शारीरिक और मानसिक तौर पर टूट चुकी है। और वो इतनी कमज़ोर हो गई है कि वो बच्चा पैदा करने की स्थिति में शारीरिक तौर पर भी सक्षम नहीं है।

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आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, डॉक्‍टरों की टीम ने अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में दिन भर इस पीड़ि‍ता की जांच कर ये फैसला लिया है कि शुक्रवार सुबह इस लड़की का अनचाहा गर्भ दूर कर दिया जाय।

ये मामला अब अच्छे नतीजे तक पहुंचा है क्योंकि कानून भले जो कहे लेकिन जो बात विचाराधीन थी वो ये कि 14 साल की लड़की अगर मां बनती है तो उसका भविष्य बरबाद हो जायेगा। बलात्कार से पैदा हुए बच्चे का भविष्य क्या होगा? सिर्फ मेडीकल पहलू नहीं है, लेकिन एक बड़ा सामाजिक और इंसानी पहलू भी महत्वपूर्ण है। अब ये उम्मीद जताई जा रही है कि पहली बार सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसले के बाद अब कानून में भी कुछ फेरबदल किया जायेगा और पीड़ि‍ता के भविष्य़ को भी अहमियत दी जायेगी।



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