नए यातायत नियमों में छूट देने में जुटे बीजेपी शासित राज्य, गुजरात से कर्नाटक तक चालान की रकम कम करने की कवायद

आम जनता को राहत देते हुए गुजरात के सीएम विजय रुपाणी ने चालान की रकम कम करने का ऐलान किया है. राज्य में यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना राशि को 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक कम किया गया है.

नए यातायत नियमों में छूट देने में जुटे बीजेपी शासित राज्य, गुजरात से कर्नाटक तक चालान की रकम कम करने की कवायद

ट्रैफिक चालान की रकम कम करने में जुटे बीजेपी शासित राज्य

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार द्वारा एक सितंबर से लागू किए गए नए यातायत नियम को बीजेपी शासित राज्य ही उसके वास्तविक रूप में लागू करने से पीछे हटते दिख रहे हैं. इसके पीछे राज्यों की दलील है कि नए नियन आम लोगों की जेब पर भारी पड़ते दिख रहे हैं. दरअसल, नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी ट्रैफिक नियम तोड़ने पर पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा चालान चुकाना होगा. आम जनता को राहत देते हुए गुजरात के सीएम विजय रुपाणी ने चालान की रकम कम करने का ऐलान किया है. राज्य में यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना राशि को 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक कम किया गया है. गुजरात के बाद अब कई अन्य बीजेपी शासित राज्य जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा शामिल हैं, भी नियमों में कुछ ढील देने पर विचार कर रहे हैं.

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वहीं, NDTV से बातचीत में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बीजेपी शासित राज्य गुजरात द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन पर बढ़ाए गए जुर्माने में भारी कटौती करने को ज्यादा तूल नहीं देते हुए कहा कि यह मामला समवर्ती सूची का है और इसमें राज्य अपने फैसले लेने को स्वतंत्र हैं. गडकरी ने कहा कि पहली बात यह है कि मोटर वाहन कानून समवर्ती सूची में है. केंद्र और राज्य सरकारों को इस बारे में कानून बनाने का अधिकार है. राज्य वहीं फैसला लेंगे जो उन्हें उचित लगेगा. बता दें कि विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पहले ही इस कानून को लागू करने से पहले ही इनकार कर चुके हैं. 

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उन्होंने कहा कि जो राज्य इस नए कानून को लागू करने से इनकार कर रहे हैं उनके लिए 'जिंदगी से ज्यादा क्या पैसा महत्वपूर्ण है.' नितिन गडकरी ने कहा, 'मैंने जीवन की रक्षा करने का संकल्प लिया था और यह (नया कानून), जान बचाने के लिए किया गया है. यह मेरा पहला उद्देश्य है, लेकिन मुझे राज्य सरकारों के सहयोग की जरूरत है. यह पार्टियों और राज्य सरकारों के ऊपर होना चाहिए.

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नितिन गडकरी ने राज्यों से यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने में ढील देने की भी अपील की है. नितिन गडकरी ने कहा, 'यह कोई राजस्व इकट्ठा करने की योजना नहीं है.. क्या आपको डेढ़ लाख लोगों की मौत की चिंता नहीं है?' उन्होंने कहा, 'अगर राज्य सरकारें जुर्माने की रकम को घटाना चाहती हैं तो ठीक है, लेकिन क्या यह सच्चाई नहीं है कि लोग न तो कानून को मानते हैं और न ही इससे डरते हैं.'

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आपको बता दें कि गुजरात सरकार ने 'मानवता के आधार पर' यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगाए जाने वाले जुर्माने में 90 फीसद तक की कटौती करने का निर्णय लिया है. हालांकि राज्य सरकार के इस फैसले ने बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि बीजेपी जुर्माने में बढ़ोतरी की पक्षधर रही है. हालांकि अब खुद बीजेपी शासित राज्य के ही एक मुख्यमंत्री ने जुर्माने में कटौती का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व गुजरात के सीएम विजय रूपाणी से जवाब तलब कर सकती है.

जुर्माने की रकम कई गुना बढ़ी
बता दें कि मोटर व्हीकल एक्ट (Motor vehicle act) में हुए बदलाव सुर्खियां बटोर रहे हैं. यह पूरे देश में एक सितंबर से लागू हो गया है. हालांकि कुछ राज्यों ने इन्हें लागू नहीं करने का फैसला किया है. ऐसे कई अपराध हैं जिनके लिए जुर्माने की रकम बढ़ा दी गई है. बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर पहले पांच सौ रुपये तक जुर्माना था. यह अब 5000 रुपये होगा. ओवरस्पीडिंग के लिए पहले चार सौ रुपये तक जुर्माना था, अब यह हल्के वाहनों के लिए एक से दो हजार रुपये होगा जबकि मध्यम और भारी वाहनों के लिए दो हजार से चार हजार रुपये. खतरनाक ड्राइविंग में पहली बार पकड़े जाने पर छह महीने तक की सजा और एक हजार तक का जुर्माना होता था. इसे अब बढ़ाकर छह महीने से एक साल तक की सजा और एक हजार से पांच हजार रुपये तक का जुर्माना कर दिया गया है.