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रामचंद्र छत्रपति: वह पत्रकार जिसने राम रहीम के काले कारनामों का किया था भंडाफोड़, जानें पूरा केस

छत्रपति ने अपने अखबार ‘पूरा सच’ (Poora Sach) में एक पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें यह बताया गया था कि डेरा मुख्यालय में राम रहीम किस प्रकार महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं.

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रामचंद्र छत्रपति: वह पत्रकार जिसने राम रहीम के काले कारनामों का किया था भंडाफोड़, जानें पूरा केस

अपने पिता राम चंद्र छत्रपति की तस्वीर के साथ अंशुल छत्रपति.

खास बातें

  1. छत्रपति को 2002 में गोली मार दी गई थी
  2. 2006 में सीबीआई को सौंपा गया था केस
  3. पहले से जेल में है राम रहीम सिंह
नई दिल्ली:

गुरमीत राम रहीम सिंह (Gurmeet Ram Rahim Singh) को पंचकुला की सीबीआई कोर्ट (CBI Court)गुरुवार को पत्रकाररामचंद्र छत्रपति (Ramchandra Chatrapati) की हत्या में मामले में सजा सुनाएगी. रामचंद्र छत्रपति वही पत्रकार थे, जिन्होंने राम रहीम के काले कारनामों का भंडाफोड़ किया था. छत्रपति ने अपने अखबार ‘पूरा सच' (Poora Sach)में एक पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें यह बताया गया था कि डेरा मुख्यालय में राम रहीम किस प्रकार महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं. गुमनाम साध्वी की यह वो चिट्ठी थी, जिसमें राम रहीम के खिलाफ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से गुहार की गई थी. इसके बाद छत्रपति को 24 अक्टूबर 2002 को गोली मार दी गई थी. गंभीर रूप से घायल होने के कारण पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी और 2003 में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था. इस मामले को 2006 में सीबीआई को सौंप दिया गया था. जिसने जुलाई 2007 में आरोप पत्र दायर किया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए छत्रपति के बेटे अंशुल ने बताया कि उन पर केस वापस लेने के लिए कई बार दबाव बनाया गया. अंशुल ने बताया, 'हमें पैसों का कोई डायरेक्टर ऑफर नहीं दिया गया था. हालांकि, कई नेताओं द्वारा हम तक यह बात पहुंचाई गई कि पैसा सबसे बड़ा मरहम है. ये ऑफर ऐसे दिए गए कि हमें समझाया गया कि परिवार पहले बहुत कुछ झेल चुका है. अब परिवार को और कोई नुकसान का जोखिम नहीं उठाना चाहिए. मुझे एक बार किसी ने बताया कि मुझे पांच करोड़ रुपए का ऑफर दिया जा रहा है. लेकिन मैंने उसे कभी नहीं ढूंढ़ा कि यह ऑफर किसने दिया.'


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51 वर्षीय राम रहीम अपनी दो अनुयायियों के बलात्कार के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल कारावास की सजा काट रहा है. इस मामले के तीन अन्य दोषी कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल अम्बाला जेल में बंद हैं. 2002 के पत्रकार हत्या मामले में विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने 11 जनवरी को राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराया था. राम रहीम और तीन अन्य को जब दोषी ठहराया गया था तब भी वे वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश हुए थे. चारों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया जा चुका है. निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को शस्त्र कानून के तहत भी दोषी ठहराया गया है. धारा 302 के तहत न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है. मारे गए पत्रकार के परिवार ने दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग की है.

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फैसला सुनाने की संभावना के मद्देनजर हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. हरियाणा विशेषकर पंचकूला, सिरसा (डेरा मुख्यालय) और रोहतक जिलों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सशस्त्र पुलिस, दंगा रोधी पुलिस और पुलिस बल की कई कंपनियां तैनात की गई हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पंचकूला अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. हरियाणा पुलिस ने अदालत जाने वाले मार्ग पर अवरोधक लगाए हैं. 

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जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि लोगों को अनावश्यक रूप से एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जाए और अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए. पुलिस ने बताया कि हरियाणा में सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के निकट अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है.    

उल्लेखनीय है कि राम रहीम की दोषसिद्धि के बाद अगस्त 2017 में हरियाणा के सिरसा और पंचकूला में हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे.

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