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रॉबर्ट वाड्रा पर कसा शिकंजा: स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और हरियाणा के पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ ED ने दर्ज किया केस

एफआईआर में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम भी है. इस मामले में शहर की पुलिस ने पहले ही मामला दर्ज कर रखा है.

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खास बातें

  1. प्रवर्तन निदेशालय की वाड्रा के खिलाफ कार्रवाई
  2. स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के खिलाफ केस दर्ज
  3. FIR में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का भी नाम
नई दिल्ली:

गुरुग्राम लैंडस्कैम (Gurugram Land Scam)में रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) पर शिकंजा कसा गया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी (Skylight Hospitalit)हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) का नाम भी है. के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है. दरअसल यह केस गुरुग्राम पुलिस की उस एफआईआर पर हुआ है जो जमीन घोटाले से जुड़ी है. शिकायतकर्ता सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि सा 2007 में स्काई स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी कंपनी ने गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के जरिए साढ़े 3 एकड़ जमीन औने-पौने रेट में खरीदी. इस कंपनी के डायरेक्टर रॉबर्ट वाड्रा हैं. 

आरोप है कि उस दौरान हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नियम ताक पर रखते हुए इस जमीन को कमर्शियल बना दिया. इसके बाद डीएलएफ ने स्काईलाइट कंपनी को करोड़ों का फायदा पहुंचाते हुए इस जमीन को 58 करोड़ रुपये में खरीद लिया. पुलिस के अनुसार, स्काईलाइट कंपनी ने जब रजिस्ट्री करवाई, उस समय इस कंपनी की वर्थ एक लाख रुपये थी और इस कंपनी के अकाउंट में पैसे भी नहीं थे. रजिस्ट्री के दौरान जो चेक लगाए गए, वह भी कहीं पर कैश नहीं हुए. हुड्डा पर यह भी आरोप है कि वजीराबाद गांव में 350 एकड़ जमीन डीएलएफ कंपनी को गलत तरीके से अलॉट कर उसे करीब 5 हजार करोड़ का फायदा पहुंचाया. इस मामले की जांच ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत करेगी. 


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बता दें, प्रवर्तन निदेशालय( ED) ने हालही वाड्रा की कंपनियों से जुड़े कुछ लोगों के परिसरों पर छापे मारे थे. ये छापे रक्षा सौदे में कुछ लोगों द्वारा कथित रिश्वत लेने के संबंध में मारे गए थे. सूत्रों के मुताबिक कहा कि छापे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और बेंगलुरू में तीन जगहों पर मारे गए थे.

ईडी के सूत्रों के अनुसार, स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी के सुखदेव विहार स्थित कार्यालय में भी छापे मारे गए थे. हालांकि, वाड्रा के वकील सुमन ज्योति खेतान ने इन छापों को 'बदले की राजनीति और दुर्भावनापूर्ण' बताया था. साथ ही खेतान ने कहा था, "पांच वर्षो से, वर्तमान सरकार ने मेरे मुवक्किल वाड्रा को डराने, उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का हरसंभव प्रयास किया है. सरकार ने बदनीयती और उनकी छवि को बिगाड़ने और उनके परिजनों पर निशाना साधने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग समेत सभी एजेंसियों का इस्तेमाल किया."

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इसके अलावा वकील ने कहा था, 'इसी इरादे से जयपुर और दिल्ली के ईडी अधिकारियों ने सुखदेव विहार, नई दिल्ली के कार्यालयों पर छापा मारा और इसके साथ ही नोएडा स्थित उनके सहयोगी के आवास पर छापा मारा. छापे पूरी तरह से अवैध तरीके से सुबह से ही मारे जा रहे हैं और किसी भी कर्मचारी को परिसरों में जाने की अनुमति नहीं है. इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक यह है कि सरकार या ईडी बार-बार आग्रह करने के बाद भी कार्यालय खोलने के लिए कर्मचारियों का इंतजार नहीं कर रहे थे.'

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उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने अवैध रूप से दरवाजों और तालों को तोड़ दिया और कार्यालय में प्रवेश कर गए. उन्होंने कार्यालय के सभी केबिन के ताले भी तोड़ दिए हैं

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