'हज तीर्थयात्राओं के लिए सब्सिडी असंवैधानिक नहीं'

खास बातें

  • उच्चतम न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में शुक्रवार को कहा कि हज यात्रा के लिए मुस्लिमों या अन्य धर्मों को इसी प्रकार के लाभ देना संविधान का उल्लंघन नहीं है।
New Delhi:

उच्चतम न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में शुक्रवार को कहा कि हज यात्रा के लिए मुस्लिमों या अन्य धर्मों को इसी प्रकार के लाभ देना संविधान का उल्लंघन नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि हज करने के लिए मुस्लिमों को सब्सिडी देना अनुच्छेद 14 :समानता:, 15 बी :गैर भेदभाव: और 27 :किसी भी धर्म को प्रोत्साहित करने के लिए कोई सार्वजनिक कर नहीं देना: का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि यदि सार्वजनिक धन का कुछ हिस्सा तीर्थयात्रा में छूट के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें कोई असंवैधानिक बात नहीं है। पीठ ने कहा, हमारा मानना है कि अनुच्छेद 27 का उल्लंघन उस स्थिति में होगा यदि भारत में एकत्र की जाने वाली समस्त आय कर का पर्याप्त हिस्सा या संपूर्ण केन्द्रीय आबकारी या सीमा शुल्क या विक्रय कर का पर्याप्त हिस्सा या किसी भी अन्य प्रकार के कर के पर्याप्त हिस्से का किसी धर्म विशेष या धार्मिक संप्रदाय के प्रोत्साहन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पीठ ने कहा, दूसरे शब्दों में मान लीजिए कि भारत में एकत्र किये गये 25 प्रतिशत आय कर का इस्तेमाल किसी धर्म विशेष या धार्मिक संप्रदाय को प्रोत्साहित करने में किया जाता है तो हमारे विचार में यह संविधान के अनुच्छेद 27 का उल्लंघन होगा। उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी भाजपा के पूर्व सांसद प्रफुल्ल गोरदिया की याचिका को खारिज करते हुए दिया जिन्होंने हज कमेटी अधिनियम 1959 की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी थी कि यह संविधान विशेष तौर पर अनुच्छेद 27 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि वह हिन्दू है लेकिन उसके द्वारा दिए जाने वाले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कर का कुछ हिस्सा हज यात्रा में चला जाता है जो सिर्फ मुस्लिमों द्वारा की जाती है। उन्होंने अनुच्छेद 27 का हवाला दिया जिसमें किसी धर्म विशेष के प्रोत्साहन के लिए कर के भुगतान का निषेध है। न्यायालय ने इस संबंध में केन्द्र सरकार और उप्र सरकार के हलफनामों पर भी गौर किया जिसमें कहा गया था कि इलाहाबाद के कुंभ मेला, चीन की मानसरोवर यात्रा और पाकिस्तान के गुरूद्वारों में जाने के लिए तीर्थयात्रियों को विशेष छूट दी जाती है।

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