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तेज रफ्तार वाली T18 ट्रेन को पटरी पर उतारने की गति धीमी पड़ी

ट्रेन में खानपान सामग्री रखने के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण परिचालन शुरू होने में देरी

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खास बातें

  1. आईआरसीटीसी ने कैटरिंग को लेकर ट्रेन में कुछ बदलाव के सुझाव दिए
  2. जगह नहीं बढ़ाई गई तो टॉयलेट के आसपास भोजन रखना पड़ेगा
  3. इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल विभाग में कुछ अनबन के कारण भी देरी
नई दिल्ली:

भारत की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन T18 दिल्ली से बनारस के बीच प्रधानमंत्री की हरी झंडी के बाद पटरियों पर जल्द ही दौड़ेगी. रेलवे की योजना इसे कुम्भ से पहले चलाने की थी पर देरी ट्रेन में खानपान रखने की पर्याप्त जगह नहीं होने से हो गई. आईआरसीटीसी (IRCTC) ने कैटरिंग को लेकर ट्रेन में कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं. रेल मंत्री ने माना उस पर अमल हो रहा है.

ट्रायल के दौरान T18 ने 180 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाई. 26 दिसंबर को रेल मंत्री ने स्पीड के नए कीर्तिमान का वीडियो ट्वीट किया. लेकिन देश की सबसे तेज़ गति वाली T18 की गति पटरी पर उतारने में धीमी पड़ गई. दरअसल, ट्रेन में खान-पान सामग्री रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. अगर खाना रखने की जगह नहीं बढ़ाई गई तो टॉयलेट के आसपास भोजन रखना पड़ता. लिहाजा IRCTC ने इस बारे में सुझाव दिए.

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस मसले पर सवाल के जवाब में कहा कि जीवन में 'ओनली कांस्टेंट इज़ चेंज' आपने सुना होगा. और सुधार करना ही चाहिए. हर चीज में सुझाव मिलें. आप सबसे अनुरोध है कि T18 शुरू हो जाएगी तो आप जरूर उसमें ट्रेवल करना. और उसके बाद आपके और कुछ अच्छे सुझाव आएंगे उसके लिए भी हम तत्पर हैं.


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बताया जाता है कि सुरक्षा के सर्टिफिकेशन को लेकर इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल विभाग में कुछ अनबन है. देरी की वजह यह भी है. लेकिन पीयूष गोयल कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही T18 को हरी झंडी दिखाएंगे.

 

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दिल्ली से बनारस के लिए सबके तेज गति से चलने वाली भारत में ही डिजाइन की गई और भारत की ही फैक्ट्री में बनी हुई मेक इन इंडिया के इनिशिएटिव की ट्रेन T18 थोड़े ही दिनों में शुरू होने वाली है. दिल्ली से बनारस लगभग आठ घंटे में सफर करेगी. जो आज फास्टेस्ट ट्रेन उस रूट पर है वह इससे लगभग डेढ़ गुना समय लेती है.

VIDEO : स्वदेशी ट्रेन ने तोड़े रफ्तार के रिकार्ड

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जानकार बताते हैं कि ट्रायल में बेशक ट्रेन ने 180 का कांटा छुआ, लेकिन बनारस रूट पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार पर दौड़ाना मुमकिन ही नहीं है, क्योंकि इस ट्रैक पर सैंक्शन स्पीड 130 की ही है. यानी ट्रेन की राह फिलहाल आसान नहीं. तेजी से पहुंचाने वाली स्पीड ही उसकी देरी का सबब बन सकती है.



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