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स्‍कूलों में आठवीं तक हिंदी की अनिवार्यता की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

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स्‍कूलों में आठवीं तक हिंदी की अनिवार्यता की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

देश के सभी स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के छात्रों के लिये हिंदी अनिवार्य करने का निर्देश केंद्र और राज्यों को देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है. कोर्ट ने कहा कि ये सरकार का काम है और सरकार इस पर कदम भी उठा रही है. कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगा. कोर्ट ने कहा कि आज हिंदी की बात है कल कोई संस्कृत का मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट आ जाएगा. हल्के मूड में CJI खेहर ने याचिकाकर्ता बीजेपी प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय के वकील RS सूरी को कहा कि आप और हम पंजाबी की मांग करेंगे.

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता खुद ही बीजेपी से जुडे हैं, वो सरकार के पास जाएं. उसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली. उल्‍लेखनीय है कि याचिका में संविधान के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए 1968 के त्रिभाषा फार्मूले की राष्ट्रीय नीति के प्रस्ताव पर राज्यों द्वारा केंद्र से परामर्श करके अमल नहीं करने का हवाला दिया गया है.

याचिका में कहा गया है कि त्रिभाषा फार्मूले में ''हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी, अंग्रेजी और एक आधुनिक भारतीय भाषा और गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी, अंग्रेजी और एक क्षेत्रीय भाषा'' के अध्ययन का प्रावधान है लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है. याचिका में कहा गया है कि भाईचारा बढ़ाने और एकता तथा राष्ट्रीय समरता सुनिश्चित करने के लिये पूरे देश में कक्षा एक से कक्षा आठ तक के छात्रों के लिये हिंदी अनिवार्य की जानी चाहिए.

याचिका के अनुसार 1968 की नीति को संसद ने भी अपनाया है. यह नीति कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे गैर हिंदी भाषी राज्यों की मांग पर बनाई गई थी, हालांकि सभी राज्यों ने आज तक त्रिभाषा फार्मूले का पालन नहीं किया.

याचिका में कहा गया है कि लोक सेवक और उच्चतर न्यायपालिका के न्यायाधीश, जिन्होंने क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई की है, हिंदी भाषी राज्यों में काम करते वक्त हिन्दी में पढ़ने, लिखने और बोलने में दिक्कतों का सामना करते हैं, कक्षा एक से आठवीं तक हिंदी अनिवार्य करके इस समस्या से आसानी से निबटा जा सकता है. याचिका में तर्क दिया गया है कि छात्र इस समय अंग्रेजी को अनिवार्य और हिंदी का वैकल्पिक भाषा के रूप में चुनाव करते हैं जो उचित नहीं है, याचिका के अनुसार प्रत्येक देश राष्ट्रभाषा को पाठ्यक्रम में अनिवार्य हिस्सा बनाता है लेकिन भारत में आठवीं कक्षा तक हिंदी भाषा अनिवार्य नहीं है.


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