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#मैंऔरमेरीहिन्दी : जब अंडर सेक्रेटरी को मज़ाक में 'नीच सचिव' कहते थे

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#मैंऔरमेरीहिन्दी : जब अंडर सेक्रेटरी को मज़ाक में 'नीच सचिव' कहते थे

खास बातें

  1. हरिवंशराय बच्चन ने अंडर सेक्रेटरी के पद पर विदेश मंत्रालय में काम किया
  2. इस विभाग के हिंदी नाम का सुझाव बच्चन ने ही दिया था
  3. गृह मंत्रालय के लिए उन्होंने देश मंत्रालय नाम भी सुझाया था

हिन्दी भारत के कई हिस्सों में बोली जाने वाली भाषा है, वह भाषा, जिसमें हममें से कई लोग अपने घर, दोस्तों और दफ्तर के साथियों के साथ बात करते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा प्रचलित होने के बावजूद कई निजी और सरकारी संस्थानों में आधिकारिक पत्राचार के लिए अंग्रेजी का ही इस्तेमाल होता है. ऐसे ही एक सरकारी दफ्तर में मशहूर लेखक डॉ हरिवंशराय बच्चन ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिताया था.

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यह हिन्दी क्विज़ खेलिए और जांचिए, कितनी हिन्दी जानते हैं आप...

'शुक्रिया डोरेमॉन... हम तो हैरान हैं, हमारे बच्चे को इतनी अच्छी हिन्दी आई कैसे...'

अवचेतन की भाषा को भुला बैठना ही है भारत की समस्या...
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वह विदेश मंत्रालय में कार्यरत थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू उनकी कविताओं और लेखन शैली के प्रशंसक थे और मंत्रालय के हिन्दी संभाग में उन्हें ओएसडी (Officer on Special Duty) के पद के लिए चुना गया था. बच्चन ने इस मंत्रालय के हिन्दी विभाग में काम करने से जुड़े अपने अनुभव के बारे में अपनी आत्मकथा के चौथे हिस्से 'दशद्वार से सोपान तक' में काफी विस्तार से लिखा है.


'अंडर सेक्रेटरी यानी नीच सचिव'
1956 में हरिवंश राय बच्चन ने विदेश मंत्रालय के हिन्दी विभाग में अवर सचिव (under secretary) के पद का कार्यभार संभाला. उनका काम यह सुनिश्चित करना था कि अंग्रेजी की छाया से बाहर निकलकर मंत्रालय के औपचारिक कामकाज में भी हिन्दी अपनी जगह बना सके. इसमें सरकारी दस्तावेज़ों का हिन्दी अनुवाद करना भी शामिल था, लेकिन बच्चन की मानें तो यह काम इतना आसान नहीं था, जितना उन्होंने सोचा था. हिन्दी के इस्तेमाल को लेकर मंत्रालय के अफसरों की जो सोच थी, उसका सामना करना काफी चुनौतीपूर्ण था. बच्चन लिखते हैं 'सुना है जब सेक्रेटरियों का हिन्दी नामकरण किया जा रहा था, तब अंडर सेक्रेटरी के लिए 'नीच सचिव' भी सुझाया गया था, शायद हिन्दी की शब्दावली का मज़ाक उड़ाने के लिए...'

बच्चन ने आगे लिखा, 'किसी अफसर की आंखों में मुझे इस विश्वास की छाया भी न दिखी कि उस मंत्रालय में कभी निकट या सुदूर भविष्य में भी उत्तरोतर (प्रगतिवादी) हिन्दी का प्रयोग होगा. हिन्दी अभी भी अंग्रेज़ीदां अफसरों के बीच मज़ाक की ही चीज़ थी. अंडर सेक्रेटेरी को 'नीच सचिव' कहकर हंसने की बात पहले लिख चुका हूं. कोई पूछता रेडियो को क्या कहेंगे? - विद्युत प्रसारण यंत्र? तोले भर अंग्रेजी शब्द के लिए सेर भर का हिन्दी शब्द!'

बच्चन का लिखा वह ब्लैक बोर्ड...
इसके बाद बच्चन और हिन्दी विभाग के उनके साथी काम में जुट गए, जिसका ज़िक्र करते हुए बच्चन लिखते हैं, 'विदेश मंत्रालय से जो पत्र मेरी नियुक्ति के संबंध में आया था, उसमें लिखा था कि मेरा काम होगा मंत्रालय में उत्तरोत्तर (प्रगतिवादी) हिन्दी के प्रयोग में सहायता प्रदान करना. इसके लिए मुझे अपने और साथियों के बीच एक विश्वास, एक आस्था सुनिश्चित, सुदृढ़ करनी थी. मैंने एक मोटो बनाया - इस मंत्रालय में जो काम अंग्रेजी के माध्यम से किया जाता है, वह सब हिन्दी के माध्यम से भी किया जा सकता है, ठीक उसी तरह, और कहीं-कहीं उससे ज्यादा अच्छी तरह.'

बच्चन का यह संदेश एक ब्लैक बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखकर हिन्दी अनुभाग के बाहर टांग दिया गया था, जो कई साल तक वहां लगा रहा. हालांकि NDTVKhabar.com ने जब पता लगाने की कोशिश की तो जानकारी मिली की अब यह बोर्ड मंत्रालय से हटा दिया गया है.

विदेश मंत्रालय का नामकरण...
बच्चन के विभाग की जिम्मेदारी तमाम मंत्रालयों को हिन्दी नाम देने की भी थी. अंग्रेज़ों के शासन से मुक्त हुए भारत के सरकारी कामकाज और विभागों में अभी भी अंग्रेज़ियत की छाप थी, लेकिन अब उन सबकी पहचान हिन्दी में भी होनी थी. इसी कड़ी में मंत्रालयों के नामों का हिन्दी में अनुवाद भी शामिल था. बच्चन लिखते हैं –

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'श्रीगणेश के लिए Ministry of External Affairs को हिन्दी में क्या कहा जाए, इसकी चर्चा रोचक होगी. कार्यकारी यूनिट का सुझाव था, 'परराष्ट्र मंत्रालय' या 'परराष्ट्र कार्य मंत्रालय.' मैंने विदेश मंत्रालय का सुझाव दिया. मेरी चलती तो Ministry of Home Affairs को देश मंत्रालय का नाम देता - मेरे दिमाग में नज़ीर की एक पंक्ति गूंजती थी - 'टुक हिर्स हवा को छोड़ मियां, मत देस-विदेस फिरे मारा.' विदेश मंत्रालय, जो विदेश के मामलों को देखे, देश मंत्रालय, जो देश के मामलों को देखे. इस पर कहा गया - देश मंत्रालय तो देश के सब मंत्रालय होंगे. मैंने कहा कि देश मंत्रालय को जिस अर्थ से आप अभिहित करेंगे, वही बाद में रूढ़ होगा, लेकिन मेरी बात नहीं मानी गई. Ministry of Home Affairs को गृह मंत्रालय कहा गया. लेकिन विदेश मंत्रालय के बारे में मैंने पंडितजी से चर्चा की और उन्होंने मेरा समर्थन किया और मैं मंत्रालय के सभी दस्तावेज़ों में विदेश मंत्रालय का उपयोग करने लगा और मेरा शब्द अब प्रचलित हो गया. फिर भी 1967 में जो Consolidated Glossary of Technical Terms प्रकाशित की गई, उसमें Ministry of External Affairs के लिए लिए 'परराष्ट्र मंत्रालय' ही दिया गया है और विकल्प के रूप में भी 'विदेश मंत्रालय' नहीं दिया गया.'

हरिवंशराय बच्चन के इस लेख को काफी वक्त हो गया है. वर्तमान की बात करें तो विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर यह 'परराष्ट्र' शब्द देखने को नहीं मिलता, लेकिन गूगल में 'परराष्ट्र मंत्रालय' लिखने से विदेश मंत्रालय ही सामने आता है. एक बार आप भी कोशिश करके देख लीजिए...


नोट : 14 सितंबर को हिन्दी दिवस है और अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें हिन्दी से खासा लगाव है या फिर हिन्दी से कुछ शिकायत है तो फिर अगले एक हफ्ते NDTVKhabar.com पर पढ़िए हिन्दी से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां और लेख. साथ ही #मैंऔरमेरीहिन्दी के साथ ट्विटर पर लिखिए हिन्दी से जुड़ी अपनी राय, अपने अनुभव.



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