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मातृशक्ति के प्रति सम्मान की शिक्षा हमें घर से प्रारंभ करनी होगी : मोहन भागवत

उन्होंने कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है. यह तो रहेगी. पर सब कुछ उन्हीं पर छोड़ देने से नहीं चलेगा.

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मातृशक्ति के प्रति सम्मान की शिक्षा हमें घर से प्रारंभ करनी होगी : मोहन भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत

नई दिल्‍ली:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि मातृशक्ति के प्रति सम्मान की शिक्षा हमें घर से प्रारंभ करनी होगी क्योंकि ऐसा अपराध करने वाले की भी बहन और माता हैं. लालकिला मैदान में जीयो गीता संस्थान द्वारा एक दिवसीय गीता प्रेरणा महोत्सव 2019 का आयोजन किया गया था. भागवत ने एक प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि अर्जुन के सामने उर्वशी खड़ी थी जिन्हें वह एकटक देख रहे थे. बाद में उर्वशी बोली कि तुम मुझे पसंद करते हो, इसलिए देख रहे हो. तब अर्जुन कहते हैं कि आप हमारी पूर्वज हैं. माता समान है. मातृभाव से आपको देख रहा था. उन्होंने कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है. यह तो रहेगी. पर सब कुछ उन्हीं पर छोड़ देने से नहीं चलेगा. इसके साथ ही उन्होंने गीता को जीवन का सार बताते हुए कहा कि इसे संपूर्ण विश्व का बनाने के लिए शुरुआत खुद से करनी होगी. 130 करोड़ की जनता को इसे घर-घर, गांव-शहर ले जाना होगा.

सांध्वी ऋतंभरा ने कहा कि यह भारत जैसे देश में शोभा नहीं देता कि यह भ्रष्टाचारी व बलात्कारियों का देश कहलाए. अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम डॉ. उमर अहमद इलयासी ने महिला डॉक्टर की आत्मा की शांति की दुआ करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को सरेआम फांसी होनी चाहिए. जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने कहा कि गीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए जिससे इस तरह के कुसंस्कारी न पैदा हों.


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महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने साधु-संतों को आगे आने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान और उनका संरक्षण न सिर्फ हमारा कर्तव्य है बल्कि इसे धर्म स्वयं परिभाषित करता है. ऐसे में संत चरण जहां-जहां पड़े, उनसे आग्रह है कि वह इसका उच्चारण विशेष रूप से करें. इसी तरह उन्होंने नवजात और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण के प्रति भी सबको जागरुक करने का आग्रह किया.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गीता को वैश्विक धरोहर बताते हुए कहा कि यह हजारों सालों से प्रासंगिक और हर चुनौतियों व समस्याओं का समाधान खुद में समाहित किए हुए हैं. जो व्यक्ति गीता के संदेश को लेकर जीता है वह अपने मार्ग से विचलित नहीं होता है. गीता हमें सतत और सात्विक रूप से सत्य के मार्ग पर चलने का रास्ता बताता है.



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