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जानिए पीएम मोदी के बाद अब अमित शाह कैसे बने बीजेपी के सबसे बड़े नेता

बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब अमित शाह निर्विवाद रूप से स्वयं को जननेता के रूप में भी स्थापित कर चुके हैं. यह बात महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अमित शाह की रैलियों से साबित होती है.

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जानिए पीएम मोदी के बाद अब अमित शाह कैसे बने बीजेपी के सबसे बड़े नेता

गृहमंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. शाह बीजेपी के स्टार कैंपेनर के तौर पर उभर कर सामने आए हैं
  2. अरुण जेटली के निधन के बाद शाह को अधिक जिम्मेदारियां दी गई हैं
  3. शाह को कई महत्वूर्ण अंतरमंत्रालय समितियों की कमान सौंपी गई है
नई दिल्ली:

बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब अमित शाह निर्विवाद रूप से स्वयं को जननेता के रूप में भी स्थापित कर चुके हैं. यह बात महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में अमित शाह की रैलियों से साबित होती है. गृहमंत्री के रूप में अनुच्छेद 370 समाप्त करने के फैसले का श्रेय उन्हीं को जाता है. यही कारण है कि इन दोनों राज्यों में जनता के बीच अमित शाह बेहद लोकप्रिय नेता के तौर पर उभर कर सामने आए. जनसभाओं में शाह को 'हिंदुस्तान का शेर' बताया गया. महाराष्ट्र और हरियाणा में केंद्रीय नेताओं में पीएम मोदी के बाद सबसे ज्यादा उन्हीं की मांग रही. रैलियों की संख्या के हिसाब से देखें तो मोदी और शाह ने दोनों राज्यों को छान मारा. वे कोने-कोने तक गए और इन राज्यों में सत्ता की वापसी में कोई कसर नहीं छोड़ी. 

यह बतौर गृहमंत्री उनके छोटे से कार्यकाल में किए गए बड़े फैसलों का असर है कि शाह बीजेपी के स्टार कैंपेनर के तौर पर उभर कर सामने आए हैं. अभी तक वे बतौर बीजेपी अध्यक्ष इन राज्यों में चुनाव प्रचार करते आए थे. लेकिन मई में गृहमंत्री का काम संभालने के बाद उनके राजनीतिक व्यक्तित्व का एक नया रूप सामने आया है. जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को समाप्त करना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाना, राज्य के राजनेताओं को बंद करना तथा जनता पर लगाई गई पाबंदियों के चलते वे लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं. इन दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अनुच्छेद 370 के खात्मे को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया.


हरियाणा विधानसभा चुनाव में अमित शाह ने 8 रैलियों को संबोधित किया है जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने सात. अगर इस साल हुए लोकसभा चुनावों से तुलना की जाए तो तब शाह ने छह रैलियों को संबोधित किया था और पीएम मोदी ने राज्य में तीन रैलियों को. इसी तरह महाराष्ट्र की बात करें तो वहां पर चुनाव प्रचार समाप्त होने तक पीएम मोदी को 10 रैलियों को संबोधित कर चुके होंगे तो वहीं शाह 18 रैलियों को. शाह पश्चिमी महाराष्ट्र में ताकत लगा रहे हैं जो कांग्रेस-एनसीपी का गढ़ माना जाता है. अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब पीएम मोदी ने 27 रैलियों को संबोधित किया था और शाह ने 30 से भी ज्यादा.

तब बीजेपी ने महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन तोड़ कर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था और यह अमित शाह का ही फैसला था. इस लिहाज से तब उन्होंने ज्यादा ताकत लगाई थी. तब शाह मुंबई में ही डेरा डाल कर बैठे रहे थे. बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस बार चूंकि लक्ष्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि सत्ता बनाए रखना है इसलिए मोदी-शाह पिछली बार की तुलना में कम रैलियों को संबोधित किया. अमित शाह का बढ़ता कद पार्टी के भीतर बनी उस सहमति की ओर भी इशारा कर रहा है जिसमें माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी सरकार के बड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जिम्मेदारी अपने पास रख कर घरेलू और सरकार से जुड़े बड़े नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी अमित शाह को दे रहे हैं. यह तब है कि जब शाह पहली बार चुन कर लोकसभा पहुंचे हैं. 

सरकार में काम करने का इससे पहले उन्हें गुजरात सरकार का अनुभव था जहां वे मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके साथ बतौर गृह राज्य मंत्री काम करते थे. शाह को कई महत्वूर्ण अंतरमंत्रालय समितियों की कमान सौंपी गई है. एयर इंडिया के विनिवेश का जिम्मा भी उन्हीं की अध्यक्षता में गठित समिति को दिया गया है. 

वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की लंबी बीमारी और निधन के बाद पीएम मोदी ने अमित शाह को अधिक जिम्मेदारियां दी हैं. कई कैबिनेट मंत्री नियमित तौर अपने मंत्रालयों के कामकाज से जुड़े फैसलों पर चर्चा के लिए शाह से मुलाकात के लिए नॉर्थ ब्लॉक में देखे जाते हैं. शाह के बढ़ते कद का अंदाज़ा इस बात से भी हो जाता है कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति-एक पद' का नियम होने के बावजूद वे गृह मंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों पदों पर हैं क्योंकि यह माना गया कि महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा के विधानसभा चुनाव होने तक उन्हें इस पद पर रखा जाए. जगत प्रकाश नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बना कर संगठन के रोजमर्रा के काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है. 

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