राहुल को जेटली का जवाब, 'सूट-बूट वाली नहीं, सूझबूझ की सरकार है'

राहुल को जेटली का जवाब, 'सूट-बूट वाली नहीं, सूझबूझ की सरकार है'

नई दिल्ली:

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की 'सूटबूट की सरकार' की टिप्पणी पर तीखा पलटवार करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार को 'सूझबूझ की सरकार' बताया और कहा कि बूट पहनना अच्छी बात है लेकिन बूटेड आउट होना खतरनाक है।

जेटली ने सूटबूट की सरकार संबंधी राहुल की टिप्पणी पर लोकसभा में कहा, 'यह सूझबूझ की सरकार है.. अर्थव्यवस्था का संचालन और संघीय ढांचे को बरकरार रखना इसकी प्रतिबद्धता है।' वित्त मंत्री ने वित्त विधेयक पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए राहुल का नाम लिए बिना कांग्रेस के सदस्यों से मुखातिब होते हुए कहा, 'आपके नेता कह रहे थे कि 'प्रधानमंत्री विदेश के दौरे पर रहते हैं, आजकल यहां आए हैं।' कम से कम हम कहां रहते हैं, यह तो पता होता है। आपके नेता कहां जाते हैं, यह मामूल नहीं होता।' उनका इशारा राहुल गांधी के लगभग दो महीने के लिए अवकाश पर विदेश जाने की ओर था, जिसे कांग्रेस पार्टी ने पूरी तरह से गुप्त बनाए रखा।

जेटली ने प्रधानमंत्री की सदन में मौजूदगी में राहुल पर अपना प्रहार जारी रखते हुए कांग्रेस के लोकसभा चुनाव में करारी हार पर टिप्पणी की, 'बूटेड होना बेहतर है, बूटेड आउट होना खतरनाक है।'

राहुल ने अवकाश से लौटने के बाद लोकसभा में अपने पहले बयान में मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा था कि यह बड़े लोगों और सूटबूट वालों की सरकार है। उन्होंने कहा था कि सूट की बात खत्म हो गई है। आपने उसे नीलाम कर दिया है। इस बारे में अब नहीं बोलूंगा।

बुधवार को फिर सदन में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर निशाना साधते हुए कहा था, 'आपके प्रधानमंत्रीजी का, हम सबके प्रधानमंत्रीजी का हिन्दुस्तान में टूर लगा है। कुछ दिनों के लिए वह यहां आए हैं, वे थोड़ी देर के लिए पंजाब भी चले जाएं। किसानों से मिल लें, मंडी में बात कर लें। सीधा समझ में आ जाएगा कि क्या हो रहा है।'

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने जेटली की टिप्पणियों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें 'बूटेड आउट' (लात मार बाहर किया जाना) जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, यह संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

जेटली ने राहुल के विदेश में गोपनीय निजी अवकाश और प्रधानमंत्री की सरकारी विदेश यात्राओं की तुलना करते हुए कहा, 'यह एक व्यक्ति द्वारा राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन करने और एक अन्य व्यक्ति का अवकाश के लिए 'लापता' होने के बीच का फर्क है।'