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राहुल वायनाड के मैदान में, लेकिन वाराणसी में नहीं उतरीं प्रियंका, रणनीति की 10 बड़ी बातें

उत्तर भारत में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस इस समय दक्षिण भारत की ओर आस लगा रही है.

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राहुल वायनाड के मैदान में, लेकिन वाराणसी में नहीं उतरीं प्रियंका, रणनीति की 10 बड़ी बातें

प्रियंका गांधी को कांग्रेस ने वाराणसी सीट से नहीं उतारा है (फाइल फोटो)

नई : वाराणसी से प्रियंका गांधी को न उतारकर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने बड़ी गलती कर दी है क्योंकि ऐसा प्रियंका गांधी के उतरने से पूर्वांचल की करीब 26 और बिहार की 6 सीटों पर असर पड़ता है लेकिन कांग्रेस यह बड़ा दांव खेलने से पीछे हट गई है. माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस की जो स्थिति उस माहौल में प्रियंका को उतारना ठीक नहीं लगा वैसे भी खुद प्रियंका गांधी भी रायबरेली में कार्यकर्ताओं से पूछ चुकी हैं कि 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी कैसी चल रही है. मतलब प्रियंका गांधी भी विधानसभा चुनाव को लेकर ही फोकस कर रह हैं. कांग्रेस की रणनीति है कि उत्तर प्रदेश में अब प्रियंका के चेहरे के दम पर पार्टी को मजबूत किया जाए. उत्तर प्रदेश का असर बिहार में भी पड़ेगा. वहीं उत्तर भारत की राजनीति में स्थानीय क्षत्रपों से निपटने के लिए पार्टी के पास एक मजबूत चेहरा होना चाहिए. बात करें लोकसभा चुनाव की तो उत्तर भारत में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस इस समय दक्षिण भारत की ओर आस लगा रही है. यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से पर्चा भरा है.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
  1. कर्नाटक की 28,  आंध्र प्रदेश की 25, केरल की 20, तेलंगाना की 17,  पुदुच्चेरी की 1, तमिलनाडु की 39 सीटें मिलाकर यहां पर कुल 130 सीटे हैं. 
  2. कांग्रेस की नजर अब इन सीटों पर है. यहां एक बार और गौर करने लायक है. कांग्रेस के अंदर केरल की लॉबी एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है और केसी वेणुगोपाल इस समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ हमेशा देखे जा सकते हैं. 
  3. केरल में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के गठबंधन का वामदलों से सीधा मुकाबला है और वायनाड सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. 
  4. दूसरी ओर दक्षिण के राज्यों में खासकर तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के बाद अब ऐसा कोई करिश्माई नेता नहीं दिख रहा है जो अकेले दम पर क्लीन स्वीप कर सकता हो. 
  5. करुणानिधि के परिवार में ही आपस में गहरे मतभेद हैं तो दूसरी जयललिता की पार्टी एआईएडीमके भी गुटों में बंटी हुई जिस पर बीजेपी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. 
  6. आंध्र प्रदेश में भी कुछ दिन पहले तक एनडीए में शामिल रहे टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू ने भले ही विशेष राज्य के दर्जे के नाम पर समर्थन वापस ले लिया हो लेकिन वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी भी वहां एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं और बीजेपी भी राज्य में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. 
  7. आंध्र प्रदेश कांग्रेस का पुराना गढ़ रहा है लेकिन क्षत्रपों के मजबूत होने से कांग्रेस का नुकसान हुआ है अब कांग्रेस की कोशिश है कि इस राज्य में वह पुराना रुतबा हासिल कर ले. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 22 सीटें पाकर चौथे नंबर पर रही थी. 
  8. जबकि कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी वाईएसआर कांग्रेस 70 सीटें जीतकर दूसरे नंबर रही थी. राहुल गांधी पहले विशेष राज्य का दर्जा देने की बात कह चुके हैं. फिलहाल देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस आंध्र प्रदेश में कितनी सीटें पाती है. 
  9. बात करें तेलंगाना की वहां अभी टीआरएस का ही सिक्का चल रहा है. विधानसभा चुनाव में टीआरएसस ने यहां क्लीन स्वीप करते हुए  88 सीटें जीती थीं और कांग्रेस 19 सीटें पाकर दूसरे नंबर पर थी.  
  10. कांग्रेस तेलंगाना में बड़ी संभावनाएं देख रही है. यही वजह है कांग्रेस आलाकमान अब दक्षिण के राज्यों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है.
     


(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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