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सांसदों, विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जनप्रतिनिधि होते हुए दूसरा कारोबार कैसे कर सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वक्त आ गया है ये सोचने का कि भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कैसे जांच हो और तेजी से फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो.

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सांसदों, विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जनप्रतिनिधि होते हुए दूसरा कारोबार कैसे कर सकते हैं

खास बातें

  1. CBDT ने माना, 7 सांसदों और 98 विधायकों की संपत्ति में हुई बेतहाशा वृद्धि
  2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सांसद और विधायक कोई बिज़नेस कैसे कर सकते हैं
  3. 'भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ जांच हो और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो'
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सांसदों और विधायकों की संपत्ति में 500 गुना तक की बढ़ोतरी पर सवाल उठाया कि अगर सांसद और विधायक ये बता भी दें कि उनकी आय में इतनी तेजी से बढ़ोतरी बिज़नेस से हुई है, तो सवाल उठता है कि सांसद और विधायक होते हुए कोई बिज़नेस कैसे कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वक्त आ गया है ये सोचने का कि भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कैसे जांच हो और तेजी से फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आज से सालों पहले एनएन वोरा की रिपोर्ट आई थी, आपने उस पर क्या काम किया? समस्या आज जस की तस है. आपने रिपार्ट को लेकर कुछ नहीं किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता को पता होना चाहिए कि नेताओं की आय क्या है, इसे क्यों छिपाकर रखा जाए. अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी अपनी और अपने परिवार की आय के स्रोत का खुलासा करे या नहीं. 'लोक प्रहरी' एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBDT के उस सील बंद लिफाफे को खोला, जिसमें सात लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों द्वारा चुनावी हलफनामे में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी से अलग है. सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि इन सभी के खिलाफ जांच चल रही है और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस को प्राथमिकता के आधार पर भेजा जाता है. जानकारी देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नामों को सार्वजनिक नहीं किया, बल्कि कोर्ट स्टॉफ को कहा कि वापस इसे सीलबंद कर दें.

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इससे पहले CBDT ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि याचिकाकर्ता की तरफ से आरोप लगाया गया है कि 26 लोकसभा सांसद, 11 राज्य सभा सांसद और 257 विधायकों की संपति में दो चुनावों के बीच बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. CBDT ने कहा है कि आयकर विभाग ने जांच की तो पाया कि 26 लोकसभा सांसदों में से 7 लोकसभा सांसदों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. CBDT ने कहा है कि IT डिपार्टमेंट 26 लोकसभा सांसदों में से 7 सांसदों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर आगे की जांच करेगा. उसने कहा है कि 257 विधायकों में से 98 विधायकों की संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और इस बाबत जांच की जा रही है.

CBDT ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे नाम
CBDT ने कहा है कि समय-समय पर चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों को जांच की प्रगति रिपोर्ट साझा किया जाता रहा है. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान CBDT उन सांसदों और विधायकों के नामों की रिपोर्ट सीलकवर में दी, जिनकी संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. इन सांसदों और विधायकों के चुनावी हलफनामे और इनकम टैक्स रिटर्न के वेरिफिकेशन का जो परिणाम होगा, उसे निर्वाचन आयोग के साथ साझा किया जाएगा. CBDT ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत इसे साझा नहीं किया जा सकता. उसने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 26 लोकसभा सांसदों, 215 विधायकों और दो राज्यसभा सांसदों के वेरिफिकेशन रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है.

हलफनामे में कहा गया कि इन नेताओं के चुनावी हलफनामे और इनकम टैक्स रिटर्न में अपनी संपत्तियों के बारे में दी जानकारी का वेरिफिकेशन निर्वाचन आयोग और सीबीडीटी द्वारा तय किए गए मानकों के तहत हो रहा है. हलफनामे में कहा गया है कि चुनावी एफिडेविट और इनकम टैक्स रिटर्न में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी के वेरिफिकेशन रिपोर्ट के बाद अगर और जांच की जरूरत होगी तो उसे असेसिंग ऑफिसर के पास भेजा जाएगा.

लोक प्रहरी नामक संगठन ने दायर की है याचिका
CBDT ने अपना जवाब 'लोक प्रहरी' नामक संगठन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर दिया है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कई सांसदों और विधायकों की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई है. CBDT ने अपने हलफनामे में हालांकि यह भी कहा कि हर उम्मीदवारों द्वारा चुनावी हलफनामे और इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई संपत्तियों की जानकारी को वेरिफाई करना संभव नहीं है. जहां जरूरत हो तभी जांच की जाती है.

CBDT ने यह भी कहा कि चुनावी हलफनामे और इनकम टैक्स रिटर्न में संपत्तियों के बारे में दी जाने वाली जानकारी का स्वरूप अलग-अलग होता है. जहां चुनावी हलफनामे में बाजार भाव के हिसाब से उनकी संपत्ति और देनदारी की जानकारी होती है, जबकि इनकम टैक्स रिटर्न में आय से संबंधित जानकारी होती है. उसमें संपत्तियों और देनदारी के बारे में जानकारी नहीं भी हो सकती है.


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