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संदिग्ध आतंकियों का 'बिजनौर मॉड्यूल' कैसे हुआ तैयार, सोशल मीडिया से जुड़ गए तार

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संदिग्ध आतंकियों का 'बिजनौर मॉड्यूल' कैसे हुआ तैयार, सोशल मीडिया से जुड़ गए तार

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली: पांच राज्यों की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों निजाम,जकवान,गाजी बाबा और फैजान में से कुछ ने  आतंकी हमले करने के लिए पैसा इकठ्ठा करने के लिए अपनी प्रापर्टी बेच दी थी. सूत्रों की माने तो इस ग्रुप को नहीं पता था कि कैसे हमला करना है, लेकिन उनके हैंडलर्स ने उनको लोन वुल्फ अटैक करने के लिए तैयार किया था.

सवाल है कि ये कैसे रैडिक्लाइज हुए? सोशल मीडिया पर अपलोड होने वाली संदिग्ध पोस्टों पर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और आंध्र पुलिस नजर बनाए हुए थी. अखलाक की हत्या और पहलू खान, अजान, लाउडस्पीकर जैसे लोकल इश्यूज आनलाइन पोस्ट किए जा रहे थे. जो लोग अपने रैडिकल व्यूज कमेंट सेक्शन में पोस्ट करते थे उन पर छह महीने तक आतंकी हैंडलर्स ने नजर रखी.

इसके बाद हैंडलर्स ने उन लोगों से सिक्योर मैसेजिंग सर्विस कनवर्सेशन और टेलिग्राम पर चैटिंग शुरु की. कई तरह की धार्मिक बातों और आनलाइन धार्मिक टेस्टों के बाद जब हैंडलर संतुष्ट हो गया तो सबको अलग-अलग रोल दिए गए. जैसे मुंबई के मैकेनिक निजाम को लीडर बनाया गया और धार्मिक जानकारी के चलते फैजान उर्फ मुफ्ती को प्रचारक बनाया गया.

इन लोगों को हमला किसी ऐसे मौके पर करना था जैसे अखलाक, अफजल गुरु, बुरहान वानी, इशरत जहां की बरसी पर या फिर अचानक आए अजान लाउड स्पीकर जैसे मुद्दों के आने पर. ऑनलाइन बम बनाने की जानकारी भी इन्होंने हासिल की थी. इनका मकसद माहौल को बिगाड़ना था.

एजेंसियों के मुताबिक आतंक के हैंडलर्स की सिर्फ आईडी होती है, कोई चेहरा नहीं होता. उस आईडी के पीछे एक, दो, तीन या ज्यादा लोग भी हो सकते हैं. इस आईडी से हैंडलर किसी को जो निर्देश देता है वह डायरी में नोट कर दिया जाता है ताकि अगले हैंडलर को पता रहे कि क्या बात हुई है या निर्देश दिया गया है.


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