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सेना के पूर्व जवान मोहम्मद सनाउल्लाह के मामले में आया बड़ा ट्विस्ट, जांच अधिकारी पर ही उठे सवाल

सेना के पूर्व जवान मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) को विदेशी घोषित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है.

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सेना के पूर्व जवान मोहम्मद सनाउल्लाह के मामले में आया बड़ा ट्विस्ट, जांच अधिकारी पर ही उठे सवाल

मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) केस में आया नया मोड़

खास बातें

  1. मोहम्मद सनाउल्लाह के मामले में आया बड़ा ट्विस्ट
  2. जांच अधिकारी पर ही उठे सवाल
  3. दावा किया जा रहा है कि इस मामले में जांच ही नहीं हुई
नई दिल्ली:

पूर्व सैनिक मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) को विदेशी घोषित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है. साल 2009 में इस मामले की जांच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह गलत पहचान का मामला है. एनडीटीवी से बातचीत में असम पुलिस के पूर्व अधिकारी चंद्रामल दास (Chandramal Das) ने बताया कि आर्मी सूबेदार वह व्यक्ति नहीं हैं, जिनसे उन्होंने पूछताछ की थी. यह गलत पहचान से जुड़ा मामला है. उन्होंने बताया कि जिस मामले की उन्होंने जांच की थी वह अलग था. लेकिन उसका नाम भी  सनाउल्लाह  था. असम पुलिस से रिटायर हो चुके चंद्रामल दास (Chandramal Das) से इस कन्फ्यूजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में लगता है प्रशासनिक चूक हुई है.

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कथित गवाहों में से एक कुरान अली (Kuran Ali) ने इस संबंध में कहा, "मैं उस पुलिस अधिकारी से कभी नहीं मिला था और न ही जांच के लिए बुलाया गया था." उन्होंने आगे कहा, "2008-09 में मैं अपने गांव में भी नहीं था. मैं गुवाहाटी में था. सरकार के साथ काम कर रहा था. यहां तक कि सनाउल्लाह भी यहां नहीं थे, वह सेना के साथ थे." मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) का सर्विस रिकॉर्ड दिखाता है कि इस मामले की कथित जांच के समय यानी मई 2008 और अगस्त 2009 में मोहम्मद सनाउल्लाह मणिपुर में थे और आतंकवाद रोधी अभियानों का संचालन कर रहा थे. यहां तक कि चंद्रामल दास (Chandramal Das) ने भी स्वीकार किया है कि उस दौरान सनाउल्लाह असम में नहीं थे. कुरान अली और दो अन्य कथित गवाहों - साहबान अली और अमजद अली  ने चंद्रामल दास के खिलाफ पुलिस में अलग से शिकायतें दर्ज कराई हैं.

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वहीं, इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भास्कर ज्योति महंता ने एनडीटीवी से कहा है कि वे कानून के अनुसार कार्य कर रहे हैं और न्यायाधिकरण के आदेश का पालन कर रहे हैं.  लेकिन जो भी हो इस मामले ने विदेशियों के ट्रिब्यूनल के तरीकों के बारे में स्थानीय लोगों की चिंताओं और संदेह को बढ़ा दिया है, जिसे अवैध प्रवासियों को पहचानने के लिए पहचान के सत्यापन का काम सौंपा गया है. बता दें कि करीब 30 सालों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने वाले मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था. उन पर विदेशी होने का आरोप लगाया गया है, जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं.

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इससे पहले असम में उस सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के खिलाफ तीन अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं, जिसने पूर्व सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह (Mohammad Sanaulla) को विदेशी घोषित करने वाले दस्तावेजों की पुष्टि की थी और उनका बयान दर्ज किया था. पूर्व सैन्य अधिकारी को असम में एक हिरासत केंद्र में बंद करके रखा गया था. अधिकारियों ने सोमवार को बताया था कि तीन लोगों ने बोको पुलिस थाने में असम सीमा पुलिस के सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर चंद्रामल दास के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई. इन तीन लोगों के नाम सनाउल्लाह के बयान में गवाह के तौर पर सामने आए थे.    

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बोको पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी जोगेन बर्मन ने बताया था कि मोहम्मद कुरान अली, सुवाहन अली और अजमल अली ने प्राथमिकियों में आरोप लगाया कि सनाउल्लाह के मामले की जांच कर रहे दास ने उन्हें गवाह के तौर पर किसी बयान या किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर के लिए नहीं बुलाया था. बर्मन ने बताया था कि पुलिस ने बर्मन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में तीन मामले में दर्ज किए. राष्ट्रपति पदक से सम्मानित सनाउल्लाह को विदेशी न्यायाधिकरण, कामरूप ने विदेशी घोषित किया था जिसके बाद उनका नाम संदेहात्मक मतदाता के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद 2008 में एक मामला दर्ज किया गया. न्यायाधिकरण के फैसले के बाद सनाउल्लाह को गोलपाड़ा के एक हिरासत केंद्र में बंद कर दिया गया.    

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VIDEO: गलत पहचान का मामला? सेना के पूर्व जवान सनाउल्लाह मामले में नया मोड़



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