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सर्जिकल स्ट्राइक 2 : घुप अंधेरी रात में मिराज की आंख बना था 'नेत्र', जानें इसकी हैरान कर देने वाली खासियतों के बारे में

भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को सूरज उगने से पहले पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बड़े कैंप को तहस नहस कर दिया. उम्मीद जताई जा रही है कि इस हमले में करीब 300 आतंकी मारे गए हैं.

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सर्जिकल स्ट्राइक 2 : घुप अंधेरी रात में मिराज की आंख बना था 'नेत्र', जानें इसकी हैरान कर देने वाली खासियतों के बारे में

नेत्र की मदद से पाकिस्तान में मौजूद आतंकी कैंप तबाह

नई दिल्ली:

भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को सूरज उगने से पहले पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बड़े कैंप को तहस नहस कर दिया. उम्मीद जताई जा रही है कि इस हमले में करीब 300 आतंकी मारे गए हैं. पाकिस्तान ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद इन आतंकियों को सुरक्षा के लिए कैंप में भेजा था. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि भारत की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया आएगी, जहां सोचने और समझने का वक्त भी नहीं मिलेगा. आतंकियों को नींद में ही मौत के आगोश में सुला देने के इस प्रक्रिया में 'नेत्र' ने अहम भूमिका अदा की.  नेत्र ने भारतीय वायुसेना के विमान मिराज को निर्देशित किया. जिसके कारण मिराज पाकिस्तान की सीमा में 80 किलोमीटर घुसकर उन्हें सबक सिखाने में कामयाब रहा. नेत्र, स्वदेश में विकसित एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम है. जिसे एयरो इंडिया 2017 में वायुसेना में शामिल किया गया था. नेत्र दुश्मन की मिसाइल और विमान को जमीन, समुद्र और आकाश में सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में ढूंढ निकालने में सक्षम है. सुबह 3.30 बजे जब मिराज पाकिस्तानी आतंकियों के कैंपों को नेस्तेनाबूद कर रहा था तो उस वक्त नेत्र, गैर सैन्य पूर्व खाली इलाकों में रडार कवरेज मुहैया करा रहा था. 

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नेत्र को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है. जिसमें स्वदेशी हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल किया गया है. सूत्रों के मुताबिक नेत्र की मदद से बिना सीमा रेखा पाए किए 450-500 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया सकता है. यह दुश्मन के ठिकानों को 120 डिग्री दृश्य मुहैया कराता है. नेत्र न सिर्फ रडार सिग्नल का पता लगा सकता है बल्कि पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के बीच होने वाली सभी बातचीत को सुन भी सकता है. खास बात ये है कि यह अपने साथ कोई खुफिया कैमरा नहीं ले जाता है बावजूद इसके वह इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसों की मदद से जमीन पर मौजूद कमांडरों को सारी जानकारी मुहैया करा सकता है. 

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भारतीय वायुसेना को 2 नेत्र विमान मिल चुके हैं जबकि तीसरे नेत्र को और एडवांस बनाने का काम डीआरडीओ में चल रहा है. साल 2007 में नेत्र के  विकास का काम 2460 करोड़ रुपये बजट के साथ शुरू किया गया था. और 2017 में यह विमान भारतीय वायुसेना को सौंप दिया गया था. इस अभियान में नेत्र की भूमिका पर क्रिस्टोफर का कहना है कि नेत्र पर किया गया निवेश पूरे देश को वापिस मिल गया. नेत्र एक बार में 5 घंटें तक लगातार उड़ान भर सकता है और हवा में ईंधन भरने के साथ यह नौ घंटे तक उड़ान भर सकता है.    

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