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कुलभूषण जाधव के मामले में भारत के पास प्लान 'ए' भी है, प्लान 'बी' भी : NDTV से हरीश साल्वे

आईसीजे में भारत का पक्ष रखने वाले हरीश साल्वे का कहना है कि पहली योजना के तहत 'नैतिक जीत' के बाद कुलभूषण को तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया जा सकता है, और दूसरी योजना का रास्ता पाकिस्तानी अदालतों से होकर गुज़रता है...

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कुलभूषण जाधव के मामले में भारत के पास प्लान 'ए' भी है, प्लान 'बी' भी : NDTV से हरीश साल्वे

आईसीजे में भारत का पक्ष रखने वाले पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कुलभूषण जाधव केस के बारे में NDTV से बात की है...

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय पंचाट, यानी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस या आईसीजे में भारत ने पहली जंग जीत ली है - पाकिस्तान को अंतिम फैसला आने तक कुलभूषण जाधव की फांसी रोक देने का आदेश दिया गया है... पूर्व सॉलिसिटर जनरल और आईसीजे में भारत का पक्ष रखने वाले हरीश साल्वे का कहना है कि अब भारत के पास 46-वर्षीय पूर्व नौसेनाधिकारी को न्याय दिलाने के लिए दो योजनाएं हैं... पहली योजना के अंतर्गत आईसीजे में भारत को मिली 'नैतिक जीत' के बाद कुलभूषण को तुरंत रिहा करने के लिए अनुरोध किया जा सकता है, और दूसरी योजना से रास्ता कुछ लंबा हो जाएगा, जो पाकिस्तानी अदालतों से होकर गुज़रता है...

NDTV से बात करते हुए हरीश साल्वे ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय पंचाट वह अदालत नहीं है, जहां अपील की गई हो, और जहां हमें उनकी (कुलभूषण जाधव की) निर्दोषिता सिद्ध करनी हो... अंतरराष्ट्रीय पंचाट वह अदालत है, जहां हम बताते हैं कि पाकिस्तान ने उन्हें फांसी की सज़ा सुनाने के लिए जो तरीका अपनाया था, वह विएना समझौते का उल्लंघन है, जो बहुपक्षीय समझौता है..."

----- ----- देखें पूरा इंटरव्यू ----- -----

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देश के अग्रणी वकीलों में से एक हरीश साल्वे ने इस मामले में न सिर्फ भारत का पक्ष तैयार करने वाली वकीलों की टीम का नेतृत्व किया, बल्कि इसी सप्ताह हेग स्थित पंचाट में लगभग डेढ़ घंटे तक भारत का पक्ष भी ज़ोरदार तरीके से रखा... गुरुवार को पंचाट ने उन दलीलों से सहमति जताई, और पाकिस्तान को अंतिम फैसला सुनाए जाने तक कुलभूषण जाधव की फांसी को रोकने का आदेश भी दिया...

भारत की दलीलों को स्वीकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत ने यह भी कहा पाकिस्तान ने जासूसी के आरोप में बंद कुलभूषण जाधव से भारत को संपर्क (consular access) बनाने की अनुमति न देकर गैरकानूनी काम किया है... कोर्ट ने कहा कि विएना समझौते के तहत जासूसी तथा आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोगों के लिए भी कॉन्स्यूलर एक्सेस दिए जाने का प्रावधान है...

अब आगे के रास्तों के बारे में बात करते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि 'प्लान ए' के तहत कहा जा सकता है कि 'मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किए जाने की वजह से इस शख्स को तुरंत रिहा कर दिया जाना चाहिए...' हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि ऐसे किसी विकल्प को इस्तेमाल करने की कोशिश कोई 'मेरे जैसा एडवेन्चरस वकील' ही कर सकता है...

भारत के दावे के मुताबिक ईरान में व्यापार कर रहे कुलभूषण जाधव को वहीं से अगवा किया गया था, और वह मार्च से ही पाकिस्तान की कैद में थे... उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई थी, और उन्हें किसी से भी किसी तरह कोई संपर्क करने की अनुमति या साधन नहीं दिए गए थे... हरीश साल्वे का कहना है कि भारत यह तर्क दे सकता है कि चूंकि वह (कुलभूषण जाधव) बहुत कुछ सह चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा कर दिया जाना चाहिए...

उन्होंने कहा कि दूसरा विकल्प मौत की सज़ा को रद्द किए जाने की मांग करना हो है... हरीश साल्वे ने कहा, "उन्हें समुचित कानूनी प्रतिनिधित्व दिया जाए, और उनके मामले की सुनवाई इस तरह हो, जैसा किसी सभ्य समाज में स्वीकार्य हो..." उन्होंने यह भी कहा, "मैं आज संतुष्ट हूं कि जो कुछ भी हमने कोर्ट के सामने रखा था, उसमें से अधिकतर कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है..."

गौरतलब है कि गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय पंचाट ने इस मामले में अंतरिम फैसला सुनाया था, जिसे भारत की अहम जीत माना जा रहा है... हालांकि पाकिस्तान ने कहा था कि इस फैसले के बाद जाधव के मामले और उसके दर्जे में किसी भी तरह से कोई बदलाव नहीं हुआ है... पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल जनरल अश्तर औसाफ अली के कार्यालय ने कहा था कि वे इस मामले को 'तार्किक परिणति' तक ले जाने के लिए कटिबद्ध हैं...

आईसीजे के फैसले के बाद विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर कहा था, "मैं देश को आश्वस्त करती हूं कि कुलभूषण जाधव को बचाने के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे..."


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