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सुप्रीम कोर्ट से चिदंबरम के वकीलों ने की मांग- पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट साझा करे प्रवर्तन निदेशालय

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर ईडी की पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट मांगी.

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सुप्रीम कोर्ट से चिदंबरम के वकीलों ने की मांग- पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट साझा करे प्रवर्तन निदेशालय

चिदंबरम की कानूनी टीम ने SC में अर्जी दाखिल कर ईडी की पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट मांगी

खास बातें

  1. चिदंबरम ने SC में अर्जी दाखिल कर ईडी की पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट मांगी
  2. कपिल सिब्बल ने कहा- एजेंसी कहीं से भी अचानक दस्तावेज मांग लेती है
  3. 'तीन बार की जो पूछताछ हुई है उसकी ट्रांसस्क्रिप्ट कोर्ट के सामने रखें'
नई दिल्ली:

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अर्जी दाखिल कर ईडी की पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट मांगी. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा, 'एजेंसी कहीं से भी अचानक दस्तावेज मांग लेती है. याचिका में कहा गया है कि कोर्ट ED द्वारा उनसे पूछताछ की ट्रांसस्क्रिप्ट  देने का आदेश जारी करे. केस डायरी को सही नहीं मान सकते.' सिब्बल ने यह भी कहा, 'इससे पहले तीन बार की जो पूछताछ हुई है उसकी ट्रांसस्क्रिप्ट कोर्ट के समक्ष रखी जाए. ED कोर्ट को बताए कि उन्होंने चिदंबरम को दस्तावेजों से कंफ्रंट कराया या नहीं.'

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बता दें सुप्रीम कोर्ट में पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम के मामले में सुनवाई चल रही है. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में साफ कहा है कि आरोपी चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ किए बगैर इस गहरे घोटाले का खुलासा होना नामुमकिन है. इसलिए कोर्ट चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करे. वहीं चिदंबरम के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'जांच एजेंसी के लिए ये लाज़िमी है कि हिरासत में लेने के दावे के समर्थन में आरोपी के खिलाफ सामग्री को कोर्ट के सामने रखे. ईडी की तमाम दलीलें और तर्क आधारहीन तथ्यों पर हैं. यानी कानून का मनमाना मतलब निकाल रहे हैं.'


सिंघवी ने कहा, 'दिल्ली हाईकोर्ट ने एजेंसी की इन्हीं दलीलों और तर्कों की तस्दीक के बगैर बेल अर्ज़ी खारिज करने का आदेश दे दिया. इनकी जांच में मैं पूछताछ के लिए मौजूद रहता हूं पर इसका मतलब ये नहीं कि इनके हर सवाल का जवाब मैं इनके मनमाफिक ही दूं. पूछताछ में एजेंसी ने ऐसे सवाल किए जिनका उत्तर देने को मैं बाध्य नहीं हूं. ये अपने मन मुताबिक जवाब चाहते हैं. इसके अलावा एजेंसी की पूछताछ टीम बार-बार एक ही सवाल पूछती है, तो हर बार जवाब भी एक ही होता है. अब जब जवाब ना देना भी मेरा अधिकार है, आर्टिकल 20 के तहत मेरा ये अधिकार है कि मुझे जबरन जवाब देने को मजबूर नहीं किया जा सकता. हालांकि मैंने सारे सवालों के समुचित जवाब दे दिए हैं लेकिन आप तब तक मुझसे पूछताछ करना चाहते हैं जब तक मुझसे अपराध कबूल ना करा लें.'

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सिंघवी ने कहा, 'संवैधानिक कानून कहता है कि किसी व्यक्ति पर उस अपराध का आरोप नहीं लगाया जा सकता है जो अपराध के घटने  के समय अपराध नहीं था. ना ही उसे अपराध के लिए निर्धारित से अधिक सजा दी जा सकती है. जब आपातकाल की घोषणा हो तब भी अनुच्छेद 20, 21 बने रहते हैं. राइट टू लिबर्टी यानी स्वतंत्रता का अधिकार अपने आप में संपूर्ण है.'

सिंघवी ने कहा, 'आप किसी व्यक्ति को किंगपिन के रूप में उस वक्त चित्रित करने की कोशिश कर रहे हैं जब कथित अपराध  PMLA के तहत अपराध के रूप में मौजूद नहीं था और अपराध के रूप में परिभाषित ही नहीं था.' ऐसे में जांच एजेंसी मनमाने ढंग से इसे भूतलक्षित (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से कैसे इस्तेमाल कर सकती है?

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सिंघवी ने कहा, 'चिदंबरम वही जवाब देंगे जो उनकी इच्छानुसार होगा. वो ED के चॉयल के मुताबिक जवाब नहीं देंगे. चिदंबरम बता चुके हैं कि विदेश में उनका कोई बैंक खाता नहीं है. बेटे कार्ति के हैं जो आरबीआई की अनुमति से खोले गए हैं. इस मामले में सुनवाई लंच के बाद भी जारी रहेगी.

सिंघवी ने कहा, 'जब तक कोई विधेय अपराध न हो तब तक पीएमएलए के तहत जांच नहीं होनी चाहिए. ईडी ने कहा है कि एफआईपीबी ने मई 2007 में मंजूरी दे दी. आयकर की इन्वेस्टिगेशन विंग ने 2007 में संज्ञान लिया. राजस्व विभाग ने 2008 में नोट किया. FIPB ने 2008 में की गई हर कार्रवाई के लिए अतिरिक्त मंजूरी मांगी? 2008 के बाद कुछ नहीं किया और ये अपराध तब तक निर्धारित अपराधों के तहत नहीं था. ये मामला शुरू से ही गलत है. एफआईआर कहती  है कि 15 मई 2009 को शुरू हुआ मामला. जुलाई 2009 में ही पीएमएलए एक्ट शेड्यूल में बदलाव किया गया. साजिश, पीसी एक्ट 13 (1) (डी)  उस वक्त पीएमएलए में शामिल नहीं था.'

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अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'MISA के तहत आपातकालीन दिनों में उस समय में भी कोर्ट ने सीलबंद कवर रिपोर्ट की आलोचना की थी. एडीएम जबलपुर मामले में कुख्यात फैसले पर अदालत ने कहा था कि हमें सावधान रहना चाहिए.'

चिदंबरम की सुनवाई में सिंघवी ने कहा, चिदंबरम पूछताछ से बच नहीं रहे हैं, वो जवाब दे रहे हैं जबकि उन्हें चुप रहने का भी अधिकार है. उन्होंने आगे कहा कि 'ग्रेव' मौत की सजा, उम्रकैद या सात साल की कैद होती है. अपने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट जज ने बार-बार इस्तेमाल करने कर सिर्फ व्यक्तिपरक विशेषण जोड़ा है. सिंघवी ने कहा, चिदंबरम और कार्ति पर समान आरोप लगाए गए हैं. कार्ति को हाईकोर्ट से जमानत मिली और सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे बरकरार रखा. चिदंबरम को रोज नीचा दिखाया जा रहा है.

सिंघवी ने अग्रिम जमानत का ट्रिपल टेस्ट बताया, 

फ्लाइट रिस्क: वास्तव में कभी नहीं उठता जब तक कि किसी आतंकवादी का मामला ना हो.
असहयोग: जांच में असहयोग का मतलब वो उत्तर देना नहीं है जो आप चाहते हैं.
छेड़छाड़: 11 साल पुराने मामले में क्या छेड़छाड़ कर सकते हैं. दस्तावेज जब्त हैं. चिदंबरम 2014 तक सत्ता में थे.

सिंघवी के जिरह के बाद कपिल सिब्बल ने कोर्ट में बहस की और उन्होंने उस अर्जी की बात की जिसमें पूछा जिसमें पूछताछ का ब्योरा मांगा है. कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को कल सुनवाई के दौरान देखेंगे. ईडी ने कहा कि वो इस पर बुधवार को ही वो जवाब देंगे. फिर कपिल सिब्बल बोले, हम ये दावा कर रहे हैं कि ये सवाल चिदंबरम के सामने रखे ही नहीं गए. हमने सीबीआई रिमांड को भी चुनौती दी है. वहीं सरकारी वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, हमें चार घंटे चाहिए. फिर कोर्ट ने कहा कि हमें और भी काम करने हैं. फिलहाल कोर्ट बुधवार दोपहर सुनवाई करेगा.

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