ITR भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, खुद से रिटर्न फाइल कर रहे हैं तो इन बातों का रखें खयाल

खुद से आप ई-फाइलिंग के जरिए अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं, बस आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा, ताकि आप अपने फॉर्म में कुछ गलतियां न करें या फिर आपका फॉर्म अमान्य न घोषित हो जाए.

ITR भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, खुद से रिटर्न फाइल कर रहे हैं तो इन बातों का रखें खयाल

ITR फाइल करते समय इन बातों का रखें ध्यान. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

Income Tax Filing Guide:  2019-2020 के वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR File) करने की आखिरी तारीख 31, दिसंबर 2020 है. ऐसे में चार दिनों के भीतर आपके पास रिटर्न फाइल करने का मौका है. आप ई-फाइलिंग के जरिए अपना रिटर्न भर सकते हैं. ई-फाइलिंग से आप आसानी से रिटर्न फाइल कर पाएंगे और कहीं जाने या फिर आखिरी वक्त में होने वाली गलतियों से भी बच पाएंगे. ई-फाइलिंग करते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा, ताकि आप अपने फॉर्म में कुछ गलतियां न करें या फिर आपका फॉर्म अमान्य न घोषित हो जाए.

सही फॉर्म चुनें

रिटर्न फाइल करने से पहले इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर फॉर्म ध्यान से देख लें. अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग-अलग फॉर्म होते हैं. आपको इंडिविजुअल (सैलरी), पेंशन इनकम, एक मकान (एक प्रॉपर्टी) से इनकम या अन्य स्रोतों से आय (लॉटरी के अतिरिक्त) वाले लोगों के मामले में फॉर्म ITR-1, जिसे 'सहज' भी कहा जाता है, सेलेक्ट करना होगा. पूंजीगत लाभ होने की दशा में ITR-2 सेलेक्ट करना होगा. एक से अधिक घर होने की दशा में ITR-2A चुनें, लेकिन इस केस में कोई पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) नहीं होना चाहिए. ITR-3, ITR-4, ITR-4S फॉर्म कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के लिए है.

अपने डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय अपने पास ये दस्तावेज़ ज़रूर रखें - PAN नंबर, फॉर्म 16, बैंक खातों पर मिला संबंधित वित्तवर्ष का कुल ब्याज, टीडीएस (TDS) संबंधी जानकारी और सभी तरह के बचत व निवेश संबंधी सबूत. होम लोन और इंश्योरेंस संबंधी दस्तावेज़ भी पास रखें. इसके अलावा आप इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट से फॉर्म 26AS भी डाउनलोड कर सकते हैं, जो आपकी ओर से अब तक विभिन्न स्रोतों से की गई TDS कटौती का विवरण पेश करता है. अपना टैक्स रिटर्न वैलिडेट करने के लिए इस फॉर्म का सहारा लिया जा सकता है.

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सालाना आय 50 लाख रुपए से ज्यादा है तो

जिन लोगों की वार्षिक आय 50 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें एक और नियम याद रखना होगा. ऐसे करदाताओं को अपने फॉर्म में दिया गया एक अतिरिक्त कॉलम AL भरना होगा, जिसमें उन्हें अपनी सभी संपत्तियों का मूल्य और देनदारियों के बारे में मांगी गई जानकारी भरनी होगी. AL का अर्थ है - असेट्स और लायबिलिटीज़.

डिजिटल सिग्नेचर के साथ फाइल किया है तो आपको acknowledgement number यानी रसीद मिल जाएगी. यानी एक प्रकार की रसीद जेनरेट होती है. बिना डिजिटल सिग्नेचर के फॉर्म सबमिट करने पर ITR-V जेनरेट होता है जो आपके रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर पहुंच जाएगा. इसका मतलब है कि आपका रिटर्न फाइल हो गया है.

रिटर्न वेरिफाई कराना होगा

रिटर्न फाइल करने के बाद आपका काम खत्म नहीं होगा. आपको इसे वेरिफाई भी कराना होगा. अगर आपने इसे 120 दिनों के भीतर वेरिफाई नहीं कराया तो इसे अमान्य मान लिया जाएगा. वेरिफिकेशन के लिए आपको ITR-V पर दस्तखत कर इसे बेंगलुरू कार्यालय (जहां आपका रिटर्न प्रोसेस होता है) भेजना होगा. इसके अलावा, वेबसाइट पर ई-वेरिफाई रिटर्न ऑप्शन पर जाकर अपनी इनकम टैक्स रिटर्न को ई-वेरिफाई भी कर सकते हैं. नेट बैंकिंग के ज़रिए भी इसे वेरिफाई किया जा सकता है.


इसका रखें ध्यान

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वित्त वर्ष और आकलन वर्ष का ध्यान रखें. इस वित्त वर्ष का आकलन वर्ष 2020-21 है. आपको ओरिजिनल और रिवाइज़्ड का विकल्प भी चुनना होगा. पहली बार भर रहे हैं तो ओरिजिनल, दोबारा भर रहे हैं तो रिवाइज़्ड का ऑप्शन चुना होगा.