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डोकलाम का दोहराव न होने देने पर सहमत हुए शी चिनफिंग और नरेंद्र मोदी

पीएम मोदी ने सफल तीन दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शानदार मेहमान नवाजी के लिए चीनी सरकार और चीनी जनता का आभार जताया.

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डोकलाम का दोहराव न होने देने पर सहमत हुए शी चिनफिंग और नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग.(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पीएम मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लिया.
  2. ब्रिक्स सम्मेलन चीन में आयोजित था.
  3. वहां पर दोनों ने इस मु्द्दे पर भी बात की.
शियामेन: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भविष्य में डोकलाम जैसी घटनाओं से बचने पर मंगलवार को सहमत हुए हैं. यह इस बात का संकेत है कि दोनों देश डोकलाम सीमा विवाद को पीछे छोड़ आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. डोकलाम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच दो महीने तक चला गतिरोध हाल ही में ही सुलझा लिया गया है. इस गतिरोध के समाप्त होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात थी.पीएम मोदी ने बैठक के बाद ट्वीट किया, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात. हमारे बीच भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभावी वार्ता हुई." पीएम मोदी ने सफल तीन दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शानदार मेहमान नवाजी के लिए चीनी सरकार और चीनी जनता का आभार जताया.

शी ने कहा कि चीन और भारत के बीच स्वस्थ व स्थिर संबंध इन दोनों देशों के लोगों के मूल हितों के अनुरूप हैं. उन्होंने पीएम मोदी से कहा, "चीन आपसी राजनीतिक विश्वास बढ़ाने, पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को बढ़ावा देने और चीन-भारत संबंधों सही पटरी पर लाने के लिए शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पंचशील के सिद्धांतों के आधार पर भारत के साथ काम करने को इच्छुक है."

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बैठक के प्रारंभ में मोदी ने शी को ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी. भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर ने यहां संवाददाताओं को बताया कि शी-मोदी मुलाकात रचनात्मक रही.

उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह मुलाकात रचनात्मक रही है." जयशंकर के अनुसार, "मुझे लगता है कि बैठक के दौरान महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक यह रहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में शांति ही हमारे द्विपक्षीय संबंधों के आगे और विकास की शर्त है."  उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास का आपसी स्तर बढ़ाने और मजबूत करने के लिए अधिक प्रयास किए जाने चाहिए.  उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि बड़ी शक्तियों के बीच मतभेद के कई कारण होंगे और इन्हें पारस्परिक सम्मान के साथ सुलझाया जाना चाहिए. जयशंकर ने कहा, "रक्षा और सुरक्षा कर्मियों का मजबूत संपर्क और सहयोग बना रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाल ही में पैदा हुई स्थिति दोहराई न जाए." 

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जयशंकर ने कहा, "हम दोनों (भारत और चीन) जानते हैं कि क्या हुआ. इसलिए पिछली स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हुई. भविष्य की स्थितियों पर वार्ता हुई." जयशंकर से जब पूछा गया कि क्या मोदी ने पाकिस्तान में रह रहे जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ प्रतिबंध और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया? उन्होंने कहा कि इस पर कोई बातचीत नहीं हुई.

इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों मिटाने चाहिए और एक सहमति बनानी चाहिए तथा एक साथ मिलकर सीमा पर शांति सुनिश्चित करनी चाहिए. मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, "हमें आशा है कि भारत सही और तर्कसंगत ढंग से चीन के दृष्टिरकोण को देखेगा. हमें दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि शांतिपूर्ण तरीके एकसाथ रहना और द्विपक्षीय लाभकारी सहयोग ही दोनों देशों के बीच एकमात्र सही विकल्प है."
VIDEO: पीएम मोदी की चीन यात्रा कितनी कामयाब

भारत की राजनयिक जीत के रूप में सोमवार को शियामेन ब्रिक्स घोषणा-पत्र में आईएस और अल कायदा के साथ जेईएम और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का नाम शामिल किया गया है, जो पाकिस्तानी आतंकी संगठन हैं और भारत में आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार हैं. (IANS की रिपोर्ट)
 


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