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मिशन शक्ति की इनसाइड स्टोरी: भारत के पास 10 साल से थी ऐसी क्षमता, अब अंतरिक्ष में कर डाली 'सर्जिकल स्ट्राइक'

भारत के पास हालिया वक्त तक 48 उपग्रह थे, जो कक्षा में चक्कर काट रहे थे, और यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उपग्रहों को सबसे बड़ा ज़खीरा है, जिसकी सुरक्षा किया जाना बेहद ज़रूरी है.

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मिशन शक्ति की इनसाइड स्टोरी: भारत के पास 10 साल से थी ऐसी क्षमता, अब अंतरिक्ष में कर डाली 'सर्जिकल स्ट्राइक'

भारत का मिशन शक्ति पूरी तरह कामयाब रहा

नई दिल्ली:

Mission Shakti: भारत ने एक बहुत बड़ा कदम उठाकर यह साबित कर दिया है कि उसके पास अंतरिक्ष में मौजूद उसके उपग्रहों को सुरक्षित रखने की क्षमता है, और यह भी दिखा दिया कि अगर कोई उपग्रह उसके लिए खतरा पैदा करता है, तो भारत उसे मार गिरा सकता है. अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ऐसा कर सकते थे, और अब भारत ऐसा चौथा देश बन गया है, जिसके पास एन्टी-सैटेलाइट हथियार है. यह बिल्कुल ऐसा ही है, जैसे भारत ने अंतरिक्ष में सर्जिकल स्ट्राइक कर दिखाई हो.

भारत ने आज एक काइनेटिक हथियार का इस्तेमाल कर एक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट को मार गिराया, जिसका अर्थ हुआ कि भारत ने अपनी अंतरिक्ष संपदा की सुरक्षा करने में सक्षम होना साबित कर दिखाया है.

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भारत के पास हालिया वक्त तक 48 उपग्रह थे, जो कक्षा में चक्कर काट रहे थे, और यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उपग्रहों को सबसे बड़ा ज़खीरा है, जिसकी सुरक्षा किया जाना बेहद ज़रूरी है. आज के 'मिशन शक्ति' ने दिखा दिया है कि भारत 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी किसी सक्रिय सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखता है.

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भले ही प्रधानमंत्री ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन पूरी संभावना है कि यह माइक्रोसैट-आर था, जिसे 277 किलोमीटर की ऊंचाई पर PSLV के ज़रिये 24 जनवरी, 2019 को लॉन्च किया गया था. इस सैटेलाइट का वज़न 740 किलोग्राम था. जिस वक्त सैटेलाइट को लॉन्च किया गया था, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अध्यक्ष डॉ के सिवन ने NDTV से पुष्टि की थी कि यह सैटेलाइट रक्षा रिसर्च के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के एक विज्ञानी ने पुष्टि की कि भारत के पास एन्टी-सैटेलाइट टेस्ट करने की क्षमता कम से कम पिछले 10 साल से मौजूद है.

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इतनी ऊंचाई पर किसी सैटेलाइट को मार गिराना आसान काम नहीं है, क्योंकि सैटेलाइट बेहद तेज़ गति से, यानी सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा होता है, और इतने छोटे लक्ष्य को सटीकता से भेदना बड़ी चुनौती होता है. यह बंदूक से निकली गोली को 300 किलोमीटर की दूरी पर दूसरी गोली से भेदने जैसा है. देशों को चिंता होती है कि इस तरह के परीक्षणों से अंतरिक्ष में मलबा जमा हो जाएगा, जो अन्य सैटेलाइटों के लिए दिक्कतें पैदा करेगा. ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ जी. माधवन नायर ने कहा कि 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर भारत द्वारा किए गए इस टेस्ट से अंतरिक्ष में मलबा जमा होने की संभावना नहीं है.

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वर्ष 2012 में जब भारत ने व्हीलर आईलैंड से अग्नि-5 मिसाइल का पहला परीक्षण किया था, देश के पास सैटेलाइट को नष्ट करने की क्षमता आ गई थी. अग्नि-5 दरअसल 5,000 किलोमीटर रेंज वाली इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, और DRDO के तत्कालीन प्रमुख डॉ वीके सारस्वत ने पुष्टि की थी कि इसे सैटेलाइट लॉन्च करने या नष्ट करने - दोनों ही कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. पूरी संभावना है कि भारत ने एक नई मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल किया हो, जो आपात स्थिति में बेहद तेज़ गति से चलते उपग्रहों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर सकता हो.

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VIDEO- भारत का 'मिशन शक्ति' कामयाब



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