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फ्रांस के साथ 36 राफेल डील पर मंडराए बादल, लड़ाकू जेट को लेकर बातचीत मुश्किल में

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फ्रांस के साथ 36 राफेल डील पर मंडराए बादल, लड़ाकू जेट को लेकर बातचीत मुश्किल में

राफेल लड़ाकू जेट विमान (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू जेट विमानों की खरीद को लेकर वर्तमान भारत-फ्रांस वार्ता ऑफसेट प्रोविजन और हथियार प्रौद्योगिकी में बदलाव को लेकर मुश्किल में फंस गई है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि एक बड़ी बाधा ऑफसेट प्रोविजन है जिस पर भारत दबाव डाल रहा है, लेकिन इस पर फ्रांस का कहना है कि इससे विमान की कीमत बढ़ जाएगी।

ऑफसेट नीति रक्षा खरीद प्रक्रिया, 2005 के तहत पहली बार लाई गई थी, जिसके अंतर्गत विदेशी कंपनी को अपने करार का एक हिस्सा भारत में निवेश करना होगा। दूसरा मुद्दा यह है कि वायुसेना राफेल में कुछ विशेष प्रकार की तब्दीली की मांग कर रही है, ताकि कुछ खास हथियार उसमें लगाए जा सकें, जबकि फ्रांस ने दूसरे तरह की बदलाव की पेशकश की है। इससे भी कीमत बढ़ जाएगी।

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सूत्रों ने कहा, 'जब से मिस्र और कतर के साथ करार हुए हैं तब से ही दाम के लिए पहले से निर्धारित मापदंड हैं। अन्य दो देशों ने जिस दाम पर विमान खरीदा है, भारत के लिए विमान उससे कम दाम पर नहीं हो सकता।' उन्होंने बताया कि हाल में दोनों पक्षों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है जो संभावित गतिरोध का संकेत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान वायुसेना की संचालनात्मक जरूरतों का हवाला देते हुए 36 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के अपने फैसले की घोषणा की थी। यह घोषणा वायुसेना की आधुनिकीकरण योजना के लिए उत्साह के रूप में आया था, क्योंकि निविदा प्रक्रिया के जरिए 126 राफेल जेट खरीदने का मूल सौदा सालों से अटका पड़ा था।


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