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गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से भी उड़ान भरेंगे यात्री विमान, जल्द शुरू होगी 'उड़ान' सेवा

भारत सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत गाजियाबाद स्थित वायु सेना के हिंडन हवाई अड्डे के रूप में जोड़ा गया है.

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गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से भी उड़ान भरेंगे यात्री विमान, जल्द शुरू होगी 'उड़ान' सेवा

हिंडन एयर फोर्स स्टेशन में विमानों के लिए एक एकल रनवे बेस है

खास बातें

  1. हिंडन एयरबेस बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर विमान का घर है
  2. केंद्र सरकार ने उड़ान योजना पिछले साल अक्टूबर की लॉन्च
  3. एक घंटे तक की हवाई यात्रा का किराया 2500 रुपये तय किया गया
नई दिल्ली:

भारत सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत गाजियाबाद स्थित वायु सेना के हिंडन हवाई अड्डे के रूप में जोड़ा गया है. जल्द ही यहां से छोटे शहरों के लिए यात्री विमान सेवा शुरू की जाएगी. भारतीय वायु सेना सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) के तहत अपने हिंडन एयरबेस का असैन्य उड़ानों के लिए इस्तेमाल किये जाने पर सहमत हो गई है. केंद्र सरकार ने इस किफायती सेवा को पिछले साल अक्टूबर में लॉन्च किया था. इसके तहत पहली सेवा शिमला हवाई अड्डे से शुरू की गई थी.

पढ़ें: सरकार ने पेश की 'आम आदमी के लिए उड़ान' योजना, एक घंटे की उड़ान के लिए 2,500 रुपये किराया

नागर विमानन सचिव आरएन चौबे ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस कदम से दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डा का दबाव कम होगा. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हिंडन को दूसरे हवाई अड्डे के रूप में चलाने से इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर उड़ानों के लिए स्लॉट (जगह) की कमी दूर होगी.


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चौबे ने बताया कि आरसीएस की बोली के दूसरे दौर में हमें दिल्ली हवाई अड्डा के स्लॉट की अच्छी मांग आने की उम्मीद है. हमने महसूस किया कि दिल्ली इंदिरा गांधी एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) के लिए सारे स्लॉट उपलब्ध करवाना मुश्किल होगा और हमने इसी के मद्देनजर यह मुद्दा वायु सेना के सामने उठाया. वायु सेना हमारे साथ सहयोग के लिए तैयार है और हमारे लिए अपना एयरबेस उपलब्ध कराने पर राजी है. दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित हिंडन एयरबेस से असैन्य विमानों का परिचालन अक्टूबर के अंतिम रविवार से शुरू होने की संभावना है.

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हालांकि सरकार को इसमें छूट के लिए डीआईएएल के समक्ष मुद्दा लाना होगा क्योंकि अभी के नियमों के तहत पहले से मौजूद हवाई अड्डे के 150 किलोमीटर के दायरे में व्यावसायिक उड़ानों के लिए दूसरा हवाईअड्डा अस्वीकार्य है. चौबे ने इस बाबत कहा, ‘हमें यकीन है कि हम डीआईएएल के साथ अनुबंध संबंधी मुद्दों को सुलझाने में कामयाब रहेंगे.’ उन्होंने यह भी बताया कि स्लॉट की कमी के कारण मुंबई का छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा आरसीएस की बोली के दूसरे दौर में उपलब्ध नहीं हो सकेगा.

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सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ यानी ‘‘उड़े देश का आम नागरिक’’ के तौर पर भी जाना जाता है. इसका मकसद चुनिंदा छोटे मार्गों, जैसे दिल्ली से शिमला, पर कीमतों की सीमा तय करके उड़ान सेवाओं को रियायती बनाना है. ऐसे छोटे मार्गों पर एक घंटे की उड़ान के लिए 2,500 रुपए देने होंगे.

(इनपुट भाषा से भी)



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