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पाकिस्तानी-चीनी मीडिया ने फैलाया यह भ्रम तो भारतीय सेना ने कहा-'प्रोपेगेंडा'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने भी इस खबर को गलत बताया है. उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह की रिपोर्ट आधारहीन, दुर्भावनापूर्ण और शरारत भरा है.

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पाकिस्तानी-चीनी मीडिया ने फैलाया यह भ्रम तो भारतीय सेना ने कहा-'प्रोपेगेंडा'

भारत और चीन मिलकर भारत को परेशान करने में जुटे हैं. तस्वीर: प्रतीकात्मक

खास बातें

  1. चीनी मीडिया 158 भारतीय सैनिकों के मारे जाने का फैला रहा भ्रम
  2. चीनी मीडिया के हवाले से पाकिस्तानी न्यूज चैनल पर भी खबर
  3. भारतीय सेना ने इस खबर को सरासर गलत बताया
नई दिल्ली: चीनी मीडिया की ओर से 158 भारतीय सैनिकों के मार गिराए जाने के दावे का भारतीय सेना ने खंडन किया है. एनडीटीवी से बातचीत में भारतीय सेना के बड़े अधिकारियों ने बताया कि ये बातें चीनी मीडिया का प्रोपेगेंडा है. इस खबर में किसी भी तरह की सच्चाई नहीं है, ये सरासर गलत है. इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने भी इस खबर को गलत बताया है. उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस तरह की रिपोर्ट आधारहीन, दुर्भावनापूर्ण और शरारत भरा है. इससे पहले चीनी मीडिया ने दावा किया कि वहां की फौज ने 158 भारतीय सैनिकों को मार गिराया है. चीनी मीडिया ने दावा किया था कि तिब्बत में चीनी सेना ने एयरक्राफ्ट और टैंक के साथ ड्रिल किया था. इस दौरान सिक्किम बॉर्डर पर रॉकेट दागे गए.

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चीनी मीडिया के हवाले से पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर भी भारत-चीन के बीच युद्ध शुरू होने की खबरें चलाई जा रही हैं. पाकिस्तानी चैनल पर प्रसारित हो रही खबरों में कहा गया है कि सिक्किम सीमा पर 158 भारतीय सैनिकों को मार गिराया गया. इसे चीन के सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) पर भी ब्रॉडकास्ट किया गया.

सिक्किम गतिरोध से शुरू हो सकता है 'भीषण संघर्ष' : चीनी मीडिया

सिक्किम सेक्टर की स्थिति के दीर्घकालिक रूप लेने के बीच चीनी मीडिया ने कहा है कि चीन को भारत के साथ गतिरोध के लिए तैयार हो जाने की जरूरत है. चीन के मीडिया ने साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि इस तरह के अन्य संघर्षों से संपूर्ण वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 'भीषण संघर्ष छिड़ सकता है.

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सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के छपे लेख में दावा किया गया है कि डोकलाम पठार के पास सड़क बनाने से चीनी सेना को रोकने की भारतीय कार्रवाई 'चीन की सम्प्रभुता का गंभीर उल्लंघन है.' यह सड़क भारत-चीन-भूटान की सम्मिलित सीमा के पास है.

भारत ने सड़क निर्माण पर चिंता जताई है. भारत को डर है कि इसके माध्यम से चीनी सेना पूर्वोत्तर राज्यों तक उसकी पहुंच को बंद कर सकती है. चीन से कहा गया था कि सड़क निर्माण से मौजूदा हालात में बहुत बदलाव होंगे, जिनका भारत पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.

चीन की इस कार्रवाई के बाद पिछले एक महीने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है.

लेख में कहा गया है कि यदि भारत ‘‘कई जगहों पर गतिरोध शुरू करता है तो, उसे पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ गंभीर संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है.’’ जम्मू-कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक भारत और चीन की सीमा की लंबाई 3,488 किलोमीटर है. इसका 220 किलोमीटर लंबा खंड सिक्किम में आता है.

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सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के मीडिया समूह के इस अखबार ने लिखा है, 'चूंकि गतिरोध जारी है, इसलिए चीन को दीर्घकालिक हालात का रूप ले रहे गतिरोध से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए, साथ-ही-साथ उसे तार्किक रूख भी बनाए रखना चाहिए.' उसने लिखा है, 'चीन इसकी वकालत नहीं करता है और भारत के साथ सैन्य संघर्ष से बचता है, लेकिन चीन सम्प्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध करने से डरता नहीं है, और वह स्वयं को दीर्घकालिक संघर्ष के लिए तैयार रखेगा.' अखबार ने लिखा है, चीन के भीतर आवाजें उठ रही हैं कि भारतीय सैनिकों को  'तुरंत खदेड़ा जाना चाहिए', जबकि भारतीय जनता का विचार चीन के साथ युद्ध का है.

उसने लिखा है, 'हालांकि, दोनों पक्षों को संयम बरतने और मौजूदा गतिरोध को नियंत्रण से बाहर नहीं होने देने की जरूरत है.'

इनपुट: राजीव रंजन/भाषा
 


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