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नीरव मोदी का पता लगाने के लिए भारत सरकार ने तीन देशों से मांगी मदद: रिपोर्ट

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को जांच एजेंसियों को इस मामले में नीरव प्रत्यर्पण कराने के लिए कार्रवाई शुरू करने को कहा है.

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नीरव मोदी का पता लगाने के लिए भारत सरकार ने तीन देशों से मांगी मदद: रिपोर्ट

नीरव मोदी की फाइल फोटो

खास बातें

  1. भारत सरकार ने पहले भी मांगी है मदद
  2. मुंबई कोर्ट ने दिए प्रत्यर्पण करने के आदेश
  3. पीएनबी बैंक के करोड़ों रुपये ले उड़ा है आरोपी कारोबारी नीरव मोदी
नई दिल्ली:

नीरव मोदी का पता लगाने के लिए भारत सरकार ने यूके, फ्रांस समेत बेल्जियम से मदद मांगी थी. इस बात का खुलासा हाल ही में आई एक रिपोर्ट में हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने तीनों देश को पत्र लिखकर नीरव मोदी का पता लगाने में मदद करने की बात कही थी. खास बात यह है कि यह कोई पहला मौका नहीं था जब भारत सरकार ने इन देशों से नीरव मोदी का पता लगाने में सहयोग देने को कहा हो. इससे पहले भी कई बार विदेश मंत्रालय इस मामले में इन देशों को पत्र लिखा था. गौरतलब है कि मुंबई की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को जांच एजेंसियों को इस मामले में नीरव प्रत्यर्पण कराने के लिए कार्रवाई शुरू करने को कहा है.

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खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही नीरव मोदी द्वारा हांगकांग और दुबई की पीएनबी की शाखाओं से भी कर्ज लेने की बात सामने आई थी. बैंक की एक आंतरिक जांच रिपोर्ट से यह जानकारी दी गई है. बैंक ने फिलहाल यह रिपोर्ट सरकारी जांच एजेंसी को सौंप दी है. इस रिपोर्ट के अनुसार नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड लिमिटेड हांगकांग और फायरस्टार डायमंड एफजेडई दुबई को बैंक की हांगकांग और दुबई की शाखाओं से लोन मिला था.

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नीरव मोदी और उसकी कंपनियों का पीएनबी के साथ करीब 14,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सार्वजनिक होने के बाद इन दोनों कंपनियों को इन शाखाओं से उधार लेने की सुविधा वापस ले ली गई. आंतरिक जांच में नीरव मोदी समूह के दुबई और हांगकांग के खातों से लेन देन में धोखाधड़ी के निशान नहीं मिले हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेडी हाउस शाखा के कुछ कर्मचारियों ने नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चौकसी की कंपनियों को कई वर्ष तक विदेश से माल आयात के लिए फर्जी गारंटी पत्र जारी किए.

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VIDEO: क्या होगा नीरव मोदी का प्रत्यर्पण?

इस गोरखधंधा को देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला बताया जा रहा है. इसमें पीएनबी को कुल डूबी 14,356 करोड़ रुपये की राशि के लिए गत मार्च में समाप्त हुई पिछले वर्ष की चौथी तिमाही में 7,178 करोड़ रुपये की हानि का प्रावधान किया.(इनपुट भाषा से) 



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