भारत की पहली कोरोना वायरस संक्रमित मरीज का कठिन संघर्ष, जानिए- कैसे मिली बीमारी पर विजय

चीन के वुहान में पढ़ने वाली केरल के त्रिशूर की निवासी छात्रा कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती के साथ लड़ी और स्वस्थ हुई

भारत की पहली कोरोना वायरस संक्रमित मरीज का कठिन संघर्ष, जानिए- कैसे मिली बीमारी पर विजय

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  • बताया- 27 जनवरी को गले में खराश उभरने लगी और हालात बदल गए
  • कहा- लंबे समय तक एकदम अकेले रहना आसान नहीं था
  • काउंसलर लगातार मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहे
तिरुवनंतपुरम:

कोरोना वायरस की चपेट में आई भारत की पहली मरीज ने 39 दिन के लंबे संघर्ष के बाद इस बीमारी पर विजय पा ली. केरल की यह मरीज कोरोना से मजबूती के साथ लड़ी और स्वस्थ हुई. दुनिया भर में कहर बरसा रहे कोरोना वायरस ने 3000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और 90000 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. कोरोना के प्रभाव से उबरी बीस साल की थर्ड ईयर की छात्रा कहती हैं कि ''इस तरह लंबे समय तक अकेले, एकाकी रहना आसान नहीं था, लेकिन काउंसलर मुझे लगातार मुझसे बात करते रहे और मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहे.'' केरल की यह छात्रा कोरोना वायरस की चपेट में सबसे पहले आए चीन के वुहान शहर की एक यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत हैं.       

छात्रा अपने बुरे अनुभव को याद करते हुए बताती हैं कि ''मेरा टेस्ट पॉजिटिव (30 जनवरी) आया. मैंने अपने उन सभी दोस्तों के फोन किया जो यात्रा में मेरे साथ थे. उनसे कहा कि वे डॉक्टरों से संपर्क में रहें. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाद में उन्हें बताया कि वे स्वस्थ हैं.''     

छात्रा ने बताया कि ''डॉक्टर और अधिकारी मेरे पास आए और मुझसे सारी जानकारी ली. मेरी फ्लाइट जिससे मैं आई थी, मेरा सीट नंबर और उन लोगों का विवरण जिन्होंने मेरे साथ यात्रा की थी.''

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बीस वर्षीय छात्रा ने बताया कि उसने किस तरह इनफेक्शन से लड़ने के लिए खुद को मानसिक तौर पर तैयार किया. NDTV से बात करते हुए छात्रा ने कहा कि ''मैंने चीन के उन लोगों के बारे में सुना था जो कि इनफेक्शन से उबर गए थे. मैं जानती थी कि मैं शारीरिक रूप से बेहतर हूं. केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने मेरी मां से बात की और उन्हें आश्वस्त किया.''    

चिकित्सा छात्रा ने उसकी मदद के लिए आसपास विकसित किए गए सिस्टम के लिए आभार जताते हुए कहा कि ''लंबे समय तक एकांत में बने रहना इतना आसान नहीं होता, यहां तक कि घर वापसी के बाद भी. लेकिन यह उन काउंसलरों की वजह से संभव हो सका जि कि मुझसे नियमित बात करते रहे और मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहे. इससे मुझे बहुत सहायता मिली.''      

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वुहान यूनिवर्सिटी 13 जनवरी को चार सप्ताह की छुट्टी के लिए बंद कर दी गई, तब इस छात्रा को किसी बड़ी महामारी की आशंका नहीं थी. उसने बताया कि ''सड़कों पर सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था. 17 जनवरी को लोग सड़कों पर मास्क पहने हुए नजर आने लगे और उसके तुरंत बाद हालात एकदम बदतर हो गए.''       

वह याद करती है कि  "हमारी छुट्टी केवल चार सप्ताह के लिए थी. मैंने सोचा कि जून में हमें लंबी छुट्टी मिलनी है, हवाई यात्रा का किराया बचाने के लिए मैं तभी भारत जाऊंगी.''

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त्रिशूर की निवासी इस छात्रा ने कहा कि ''जैसे ही हालात बिगड़े हमने 23 जनवरी के टिकट बुक कर लिए. अन्य हवाई सेवाओं पर प्रतिबंध के चलते हमें कनिंघन से कोलकाता के लिए उड़ान भरना थी. 22 जनवरी को, हमें अपने सीनियरों से जानकारी मिली कि हवाई अड्डे बंद होने जा रहे हैं. हम तुरंत कनिंघन के लिए एक कनेक्टिंग उड़ान पाने के लिए हवाई अड्डे पर गए. वहां देरी होने के कारण हमने प्लेन के बजाय एक ट्रेन से यात्रा की.''

छात्रा ने यात्रा के दौरान जगह-जगह सघन जांच के बारे में याद करते हुए बताया कि ''चीन में सभी पाइंटों पर जांच हुई. यूनवर्सिटी से बाहर आते समय हमारे शरीर का टेंपरेचर लिया गया. इसी तरह की प्रक्रिया एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन पर भी अपनाई गई.''     

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करीब 20 विद्यार्थी 23 जनवरी को उसके साथ वुहान से कोलकाता पहुंचे. उनमें से कुछ ने अगले दिन केरल के लिए उड़ान भरी.

युवा छात्रा ने बताया कि समस्या कैसे शुरू हुई. उसने कहा कि ''मुझे और मेरे साथ आए छात्रों को भारतीय दूतावास से मैसेज मिला था जिसमें कहा गया था कि भारत वापसी के बाद अपने समीप के स्वास्थ्य अधिकारियों के संपर्क में रहें. मैंने अपनी वापसी के बाद 25 जनवरी को अपने हैल्थ सेंटर को सूचना दी. मुझे उसके बाद रोज ही अधिकारियों के फोन आते रहे. वे मेरे बारे में जानते रहते थे और सब सामान्य दिख रहा था. इसके बाद 27 जनवरी को मेरे गले में खराश उभरने लगी. मैंने उनको तुरंत इसकी जानकारी दी. उन्होंने एम्बुलेंस भेजी और मुझे तुरंत जनरल  हास्पिटल में भर्ती कर दिया गया. मेरी मां मेरे साथ में थीं.''            

इसके बाद उसे आइसोलेशन रूम में भर्ती किया गया. उसके सैंपल चार अन्य लोंगों के सैंपलों के साथ जांच के लिए भेजे गए. उसके अलावा बाकी के सैंपल निगेटिव मिले. उसने बताया कि ''लेकिन उसे यह किसी ने नहीं बताया. मैं 30 जनवरी तक संदिग्ध मरीज ही बनी रही. मुझे रिपोर्टों के बारे में पता चला कि त्रिशूर की छात्रा की कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है. जल्द ही डॉक्टर और नर्सें आकर मुझसे मिलीं. उन्होंने मुझे सब कुछ विस्तार से बताया.''   

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युवती ने बताया कि 20 फरवरी को उसे छुट्टी मिल गई, लेकिन उससे अपने घर में  14 दिन तक क्वारंटाइन (अलग) में रहने के लिए कहा गया.    

वुहान के अन्य छात्रों की तरह यह छात्रा भी अब तक चीन लौटने के बारे में अब तक यह तय नहीं कर पाई है. चार हफ्ते की छुट्टी के बाद 15 फरवरी को यूनिवर्सिटी खुलनी थी.

छात्रा ने बताया कि ''हमारी क्लास में 65 छात्र हैं जिसमें से करीब 45 भारतीय हैं. हम सभी फिलहाल ऑनलइन क्लास अटैंड कर रहे हैं. यह चीन में बने हालात को लेकर विशेष प्रवाधान किया गया है. हम तभी वुहान वापस लौटेंगे जब हमें इसके लिए आधिकारिक अनुमति मिले जाएगी.''   

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भारत में कोरोना वायरस के 28 केस मिले हैं जिनमें से 25 केस पिछले तीन दिनों में मिले हैं. इनमें इटली के 16 पर्यटक भी शामिल हैं. इस छात्रा समेत केरल के सभी मरीज वायरस के प्रभाव से उबर गए हैं.

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