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फाइटर जेट और टैंकों का भार उठाने में सक्षम है देश का सबसे बड़ा डबल डेकर ब्रिज

बोगीबील ब्रिज (Bogibeel bridge) को देश के सबसे मजबूत ब्रिज में से एक बताया जा रहा है. 5920 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज फाइटर जेट और जंगी टैंक का भार भी उठा सकता है.

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खास बातें

  1. पीएम मोदी ने मंगलवार को किया पुल का उद्घाटन
  2. 21 साल पहले रखी गई थी पुल की आधारशिला
  3. सैनिकों के इस्तेमाल में भी आएगा यह पुल
नई दिल्ली:

पीएम मोदी ने मंगलवार को ब्रह्मपुत्र नदी पर बने बोगीबील ब्रिज (Bogibeel bridge) का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रिज (Bogibeel bridge) स्थानीय लोगों के साथ-साथ भारतीय सेना के लिए भी काफी मददगार साबित होगा. सेना अब इस ब्रिज के इस्तेमाल से भारत-चीन बॉर्डर तक पहले के मुकाबले अब जल्दी पहुंच सकते हैं. बता दें कि बोगीबील ब्रिज (Bogibeel bridge) को देश के सबसे मजबूत ब्रिज में से एक बताया जा रहा है. 5920 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज फाइटर जेट और जंगी टैंक का भार भी उठा सकता है. इस ब्रिज (Bogibeel bridge) की आधारशिला 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखी थी.

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गुवाहाटी से तकरीबन 442 किलोमीटर दूर ये पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है, ये देश का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है. इलाके के लोगों के लिए ये पुल एक सपना पूरा होने जैसा है.इस डबल डेकर पुल को भारतीय रेलवे ने बनाया है.इसके नीचे के डेक पर दो रेल लाइन हैं और ऊपर के डेक पर 3 लेन की सड़क है. ये पुल उत्तर में धेमाजी को दक्षिण में डिब्रूगढ़ से जोड़ेगा. पहले धेमाजी से डिब्रूगढ़ की 500 किलोमीटर की दूरी तय करने में 34 घंटे लगते थे, अब ये सफर महज 100 किलोमीटर का रह जाएगा और 3 घंटे लगेंगे. इस पर 5920 करोड़ की लागत आई है.

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शुरू में इसकी लागत 1767 करोड़ आने का अनुमान लगाया गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी की हालत में ये पुल बहुत ही मददगार साबित होगा. पहले डिब्रूगढ़ जाने के लिये हम लोग पानी के जहाज़ पर निर्भर करते थे, लेकिन अब हर काम में आसानी हो जाएगी. अब तक जहाज ही धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच संपर्क का एक साधन होते थे. 2014 के आम चुनावों में बीजेपी का एक बड़ा वादा इस पुल को पूरा करने का भी था. इस पुल को देश का सबसे धीमा प्रोजेक्ट होने की बदनामी झेलनी पड़ी, हो सकता है कि 2019 के चुनावों ने उसकी गति बढ़ा दी हो. 


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