Indira Gandhi Birth Anniversary: PM मोदी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने इंदिरा गांधी को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, "हमारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि."

Indira Gandhi Birth Anniversary: PM मोदी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने इंदिरा गांधी को दी श्रद्धांजलि

इंदिरा गांधी की जयंती आज

नई दिल्ली:

देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, "हमारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि."

मंगलवार सुबह से ही इंदिरा गांधी के समाधी स्थल पर नेताओं का जमघट लगा रहा. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी को याद करते हुए ट्वीट किया, "सशक्त, समर्थ नेतृत्व और अद्भुत प्रबंधन क्षमता की धनी, भारत को एक सशक्त देश के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका रखने वाली लौह-महिला और मेरी प्यारी दादी इंदिरा गांधी जी की जयंती पर शत् शत् नमन."

कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "शहादत सब कुछ खत्म नहीं करती, यह केवल एक शुरुआत है... विश्व राजनीति में अलग पहचान, लौह इरादों से परिपूर्ण, भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती पर शत् शत् नमन ."

इंदिरा गांधी दो अलग-अलग अवधि में 15 वर्षों से अधिक समय तक देश की प्रधानमंत्री रहीं. 31 अक्टूबर, 1984 को उनकी हत्या कर दी गई थी.

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बता दें, स्वतंत्र भारत के इतिहास में चंद लोग ऐसे हुए हैं, जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उनके व्यक्तित्व की मिसालें दी गईं. इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी भी एक ऐसा ही नाम है, जिन्हें उनके निर्भीक फैसलों और दृढ़निश्चय के चलते ‘लौह महिला' कहा जाता है. जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू के यहां 19 नवंबर,1917 को जन्मी कन्या को उसके दादा मोतीलाल नेहरू ने इंदिरा नाम दिया और पिता ने उसके सलोने रूप के कारण उसमें प्रियदर्शिनी भी जोड़ दिया. फौलादी हौसले वाली इंदिरा गांधी ने लगातार तीन बार और कुल चार बार देश की बागडोर संभाली और वह देश की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं. उनके कुछ फैसलों को लेकर वह विवादों में भी रहीं. जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई भी उनका एक ऐसा ही कदम था, जिसकी कीमत उन्हें अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों जान गंवाकर चुकानी पड़ी.

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