इंदौर: अस्पताल में कोरोना मरीज के शव को चूहों ने कुतरा, मामले की होगी मजिस्ट्रियल जांच

इंदौर में इतवारिया बाजार के रहने वाले 87 साल के नवीन चंद जैन को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

इंदौर: अस्पताल में कोरोना मरीज के शव को चूहों ने कुतरा, मामले की होगी मजिस्ट्रियल जांच

इंदौर में बुजुर्ग कोरोना मरीज के शव को देखकर उसके परिवार के लोग भड़क गए.

इंदौर:

देश से सबसे साफ शहरों में शुमार इंदौर के एमवाय अस्पताल में पहले एक शव 11 दिनों बाद कंकाल में तब्दील हो जाता है, नवजात के शव को मुर्दाघर में रखकर भुला दिया जाता है, उसी शहर के दूसरे अस्पताल में अब मृतक के शव को चूहे कुतर लेते हैं. शहर के यूनिक हॉस्पिटल (Unique Hospital ) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मृत रोगी के शरीर के कुछ हिस्सों को अस्पताल में कथित रूप से चूहों ने कुतर डाला.

इंदौर में इतवारिया बाजार के रहने वाले 87 साल के नवीन चंद जैन को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई, कहा गया कि कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार प्रशासन करेगा लेकिन जब परिजन शव लेने पहुंचे तो कथित तौर पर शव के आंख, नाक, कान को चूहों ने कुतर दिया था. उनकी परिजन प्रीति जैन ने रोते हुए कहा कि यदि वो कह देते तो हम रात में ही शव लेकर चले जाते. अस्पताल वालों ने इस तरह से बॉडी क्यों छोड़ा? ये न्याय नहीं है, हमारे साथ अन्याय हुआ है.

उनके बेटे प्रकाश जैन ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उन्हें एक बैग में रखा हुआ शव सौंपा.... "हम शरीर को देखकर हैरान रह गए क्योंकि चूहों ने आंखों, चेहरे, कान और पैरों को कुतर दिया था. अस्पताल के कर्मचारियों ने उसी की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. नोडल अधिकारी, अमित मालाकार ने कहा, 'हमने अस्पताल प्रशासन से भी सवाल पूछे हैं कि ये घटना कैसे हुई, कलेक्टर साहब के निर्देश पर एडीएम स्तर की कमेटी बनी है उन्होंने जांच शुरू कर दी है, जो भी दोषी है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

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कोरोना वायरस संक्रमण काल के दौरान इंदौर के अस्पतालों में शवों की दुर्गति का यह पहला मामला नहीं है. शहर के शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय के मुर्दाघर में एक वयस्क व्यक्ति की लावारिस लाश के सड़कर कंकाल में बदल जाने का मामला पांच दिन पहले सामने आया था. यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि इसी अस्पताल में मुर्दाघर में पांच महीने के बालक के शव को कथित तौर पर छह दिन तक गत्ते के बक्से में बंद करके रखे जाने के प्रकरण का खुलासा हुआ था.
(इनपुट भाषा से भी)