बिहार की जेलों में गूंज उठे छठ के गीत

खास बातें

  • आस्था के महापर्व छठ के गीतों से न केवल बिहार की गलियां और सड़कें गुंजायमान हो रही हैं, बल्कि बिहार की जेलों में भी ये गीत गूंज रहे हैं।
पटना:

आस्था के महापर्व छठ के गीतों से न केवल बिहार की गलियां और सड़कें गुंजायमान हो रही हैं, बल्कि बिहार की जेलों में भी ये गीत गूंज रहे हैं। बिहार की विभिन्न जेलों में बंद कैदी भी सूर्योपासना का यह व्रत कर रहे हैं।

पटना की बेउर जेल में 14 महिलाओं सहित 20 कैदी छठ पर्व कर रहे हैं। बेउर जेल के अधीक्षक शिवेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि इन छठव्रती कैदियों के लिए जेल प्रशासन द्वारा सारी व्यवस्था कराई गई है जबकि अर्घ्य देने के लिए अस्थायी जलकुंड की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बेउर जेल में प्रत्येक वर्ष कैदियों द्वारा छठ व्रत किया जाता है।

बिहार की एकमात्र ओपन जेल, बक्सर ओपन जेल में भी एक परिवार कार्तिक छठ की भक्ति में डूबा है। जेल में रहने वाला ही एक अन्य परिवार उनकी मदद कर रहा है। यह परिवार बक्सर के गंगा तट पर सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को जबकि मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेगा। बक्सर की केंद्रीय जेल में भी दो कैदी लोक आस्था का पर्व कर रहे हैं।

सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माने जाने वाले छठ पर्व में पूर्वी चम्पारण की जेल में चहल-पहल देखी जा रही है। यहां 40 कैदी छठ पर्व कर रहे हैं, जिसमें 16 महिला शामिल हैं। कैदियों का मानना है कि छठ मईया के आशीर्वाद से सभी कष्ट जल्द दूर हो जाएंगे।

पूर्वी चम्पारण जेल के एक अधिकारी बताते हैं कि छठ व्रत करने वालों में कई नक्सली कैदी भी हैं। उन्होंने बताया कि छठ व्रती कैदियों के लिए तालाब की व्यवस्था है। अधिकारी के मुताबिक ऐसे तो 40 कैदी निराहार छठ व्रत कर रहे हैं, लेकिन जेल के सभी कैदी भक्ति भाव में डूबे हुए हैं। जेल में तीन दिनों से छठ के गीत गाए जा रहे हैं।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर, वैशाली और मुंगेर की जेलों में भी कई कैदियों द्वारा छठ पर्व किया जा रहा है, जिसमें कई नक्सली कैदी भी शामिल हैं। जेल विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक जेल प्रशासन पूरा ख्याल रख रहा है कि जेल में छठव्रतियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।

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शुद्धता का पर्याय माने जाने इस पर्व में जेल में भी इसका ख्याल रखा जा रहा है। जेल में कैदियों को सारी पूजन सामग्री की व्यवस्था जेल प्रशासन द्वारा ही की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि चार दिनों के इस पर्व में व्रती नहाय-खाय और खरना कर चुके हैं जबकि सोमवार को अस्ताचलगामी और मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण कर पारण करेंगे।