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कश्‍मीर में जारी हैं पाबंदियां, अक्‍टूबर में होगा इन्‍वेस्‍टर समिट का आयोजन

अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद घाटी के ताज़ा हालात पर केन्द्र सरकार लगातार नज़र बनाए हुए हैं. सुरक्षा व्यवस्था चौक चौबंद है. इस बीच कश्मीर प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहली बार घाटी में ऐसी पाबंदियां नहीं हैं.

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कश्‍मीर में जारी हैं पाबंदियां, अक्‍टूबर में होगा इन्‍वेस्‍टर समिट का आयोजन

खास बातें

  1. 'लोगों की जान बचाने के लिए ही एक हद तक पाबंदी है'
  2. 'नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है'
  3. 'पिछले एक हफ़्ते में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है'
नई दिल्‍ली:

जम्मू कश्मीर प्रशासन श्रीनगर में तीन दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन आयोजित करेगा. तीन दिवसीय यह सम्मेलन 12 अक्टूबर से शुरू होगा. राज्य के प्रधान उद्योग सचिव नवीन चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि निवेशक सम्मेलन जम्मू कश्मीर को अपनी मजबूती, रणनीति और विभिन्न क्षेत्रों संभावना को दिखाने का अवसर देगा. उन्होंने कहा कि यह उद्योग एवं कारोबारी समुदाय के मन में भय और आशंकाओं को दूर करने का भी मौका उपलब्ध कराएगा.

अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद घाटी के ताज़ा हालात पर केन्द्र सरकार लगातार नज़र बनाए हुए हैं. सुरक्षा व्यवस्था चौक चौबंद है. इस बीच कश्मीर प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहली बार घाटी में ऐसी पाबंदियां नहीं हैं.

अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद घाटी के ताज़ा हालात पर केन्द्र सरकार लगातार नज़र बनाए हुए हैं. सुरक्षा व्यवस्था चौक चौबंद है. इस बीच कश्मीर प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहली बार घाटी में ऐसी पाबंदियां नहीं हैं. पहले भी कई बार हुर्रियत नेताओं ने महीनों तक घाटी को बंद रखा है. 2016 में कई जानें गईं, तब रोक लगाई गई. इस साल पाबंदियां पहले से लगा दी गईं. हमें जान-माल के नुक़सान और पाबंदियों के बीच कोई एक चीज़ चुननी थी. हमने पाबंदियों का चुनाव किया. पाबंदियां हटाने का फ़ैसला स्थानीय स्तर पर होगा. उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती की रिहाई पर फ़ैसला भी स्थानीय स्तर पर होगा. हम नहीं चाहते कि लोग हिंसा की चपेट में आएं. हिंसा को बढ़ावा देने के लिए किसी सोशल प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

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जम्मू कश्मीर के प्रिंसिपल सेक्रेटरी समाज कल्याण रोहित कंसल ने कहा है कि लोगों की जान बचाने के लिए ही एक हद तक पाबंदी है. नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने बताया है कि पिछले एक हफ़्ते में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है.

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उधर जम्मू कश्मीर से धारा 144 हटाने की याचिका पर जल्‍द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला संवेदनशील है. इसमें सरकार को वक्त मिलना चाहिए.  सरकार पर विश्वास करना होगा. यह मामला बेहद संवेदनशील है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास वास्तविक तस्वीर होनी चाहिए, कुछ समय के लिए यह मामला रुकना नहीं चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले की सुनवाई 2 सप्ताह बाद की जाएगी.

VIDEO: लोगों की सुरक्षा के लिए लगाई गई घाटी में पाबंदी: रोहित कंसल



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