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कार्ति चिदंबरम से संबंधित मामलों की सुनवाई किस HC में होगी, सुप्रीम कोर्ट करेगा तय

पूर्व वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ कौन सा हाईकोर्ट सुनवाई करेगा ये तय सुप्रीम कोर्ट करेगा. 

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कार्ति चिदंबरम से संबंधित मामलों की सुनवाई किस HC में होगी, सुप्रीम कोर्ट करेगा तय

कार्ति चिदंबरम की फाइल फोटो

खास बातें

  1. कार्ति ने याचिका में कहा था वो तमिलनाडु के रहने वाले है
  2. ED से संबंधित मामलों को मद्रास हाईकोर्ट ट्रांसफर किए जाए
  3. जबकि कार्ति के खिलाफ FIR दिल्ली में दर्ज हुई है
नई दिल्ली:

पूर्व वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ कौन सा हाईकोर्ट सुनवाई करेगा ये तय सुप्रीम कोर्ट करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ये हम तय करेंगे कि कार्ति से संबंधित मामलों की सुनवाई मद्रास हाईकोर्ट करेगा या दिल्ली हाई कोर्ट. दरअसल कार्ति ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था वो तमिलनाडु के रहने वाले है, लिहाजा ED से संबंधित मामलों को मद्रास हाईकोर्ट ट्रांसफर किए जाए. जबकि उनके खिलाफ FIR दिल्ली में दर्ज हुई है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में तीन अप्रैल को मामले की सुनवाई करेगा.

कार्ति चिदंबरम की अर्जी पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा


मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को कार्ति चिदंबरम की ओर से दायर एक याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. कार्ति ने अर्जी में आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई की ओर से अपने खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को चुनौती दी है. मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अब्दुल कुद्दोस की पीठ ने आदेश सुरक्षित रख लिया. उन्होंने यह नहीं बताया कि आदेश किस तारीख को पारित किया जाएगा. 

वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार को कार्ति की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो( सीबीआई) ने यह कहते हुए कार्ति को जमानत देने का विरोध किया कि वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. न्यायमूर्ति एस पी गर्ग ने सीबीआई और कार्ति के वकील की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. एजेंसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति पर कुछ साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप भी लगाया.

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कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल सुब्रमण्यम जैसे वरिष्ठ वकीलों ने कार्ति की ओर से दलील पेश की कि उनके मुवक्किल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कोई मामला नहीं बनता क्योंकि इस मामले में किसी लोक सेवक से पूछताछ नहीं की गयी है और ना ही आरोपी बनाया गया है. उन्होंने कहा कि मामले में दायर प्राथमिकी में यह नहीं कहा गया है कि किस लोकसेवक या विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड( एफआईपीबी) के किस अधिकारी को प्रभावित किया गया.

कार्ति ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब सीबीआई उन्हें हिरासत में रखकर और पूछताछ करने की इजाजत नहीं मांग रही है तो उन्हें न्यायिक हिरासत में क्यों रखा जाना चाहिए. कार्ति ने उन्हें 24 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजने के एक अदालत के आदेश के कुछ घंटों के भीतर जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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