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ISI के निशाने पर भारतीय रेल, जांच के लिए खुफिया विभाग ने बिछाया जाल

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ISI के निशाने पर भारतीय रेल, जांच के लिए खुफिया विभाग ने बिछाया जाल

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अब भारतीय रेल को अपना निशाना बनाना शुरु कर दिया है

खास बातें

  1. कानपुर रेल हादसे का मास्टर माइंड दुबई में बैठा नेपाल का कारोबारी शम्शुल
  2. ट्रैक उड़ाने के लिए अरुण और दीपक को 40 लाख रुपये देने का वादा किया
  3. प्लान फेल होने पर अरुण और दीपक की नेपाल में हत्या कर दी गई
नई दिल्लीँ:

क्या पाकिस्तान की आईएसआई अब रेलवे पटरियों पर तोड़फोड़ करा के आतंकवाद को अंजाम दे रही है? इस बात का पता लगाने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दो सदस्यीय टीम बिहार भेजी है.

केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि के मुताबिक़, मंत्रालय ने राज्य पुलिस से तीन गिरफ़्तार हुए आरोपियों के बारे में जानकारी मांगी है. गिरफ्तार मोती पासवान उमा शंकर और मुकेश यादव ने दावा किया है कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे के पीछे पाकिस्तान के खुफिया विभाग आईएसआई का हाथ है.

गिरफ़्तार आरोपियों के रिश्ते नेपाल और दुबई से भी सामने आए हैं इसीलिए रॉ और इंटेलिजेंस ब्यूरो को भी जांच से जोड़ा गया है. मंत्रालय का कहना है कि अगर बिहार पुलिस जो दावा कर रही है वह  सही साबित होता है तो यह पहला मामला होगा जब पाकिस्तान का रिश्ता भारत में हुए किसी रेल हादसे से जुड़ेगा.

जांच एजेंसी की शुरुआती पुछताछ में सामने आया है कि कानपुर रेल हादसे का मास्टर माइंड दुबई में बैठा नेपाल का कारोबारी शम्शुल होदा है. जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि वे लोग लगातार बिहार पुलिस के भी सम्पर्क में हैं. बिहार पुलिस के सामने इन आरोपियों ने माना कि रेल हादसे के लिए पैसे की मदद भी इसी कारोबारी ने की थी.


इसके अलावा इस बात की भी  जांच की जा रही है कि क्या इस साजिश मे कारोबारी शम्शुल के भतीजे जियाउल हक़ और ज़ुबैर शामिल थे. इन दोनों की दिल्ली में गिरफ़्तारी हुई थी. बिहार पुलिस का दावा है कि इन दोनों के साथ राकेश यादव, गजेंद्र यादव और बृजकिशोर गिरी पूर्वी चंपारण से गए थे. और इन्हीं लोगों ने पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन में भी अक्टूबर में विस्फोटक लगाकर यात्री ट्रेन उड़ाने की कोशिश की थी.
 
इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें मोती पासवान, मुकेश यादव, उमाशंकर पटेल को घोड़ासहन से, बृजकिशोर, मुजाहिर अंसारी और शंभु गिरी को नेपाल से पकड़ा है, जबकि जुबैर और जियाउल दिल्ली से गिरफ्तार किए गए. गजेंद्र शर्मा और राकेश यादव की तलाश जारी है.
 
कैसे आया ISI का नाम
दरअसल, घोड़ासहन से 25 दिसंबर को अरुण राम और दीपक राम लापता हुए थे. 28 दिसंबर को नेपाल के जंगलों में इनकी हत्या कर दी गई. जांच में शक के आधार पर मुजाहिर अंसारी को पकड़ा गया. मुजाहिर ने पुलिस को बताया कि रक्सौल-दरभंगा रेल ट्रैक पर घोड़ासहन के पास विस्फोटक से ट्रेन को उड़ाने की साजिश थी. शम्शुल होदा ने यह प्लान तैयार किया था और इसमें बृजकिशोर, उसका साला शंभु और मुजाहिर शामिल थे.

ट्रैक उड़ाने के लिए शम्शुल ने अरुण और दीपक को 20-20 लाख रुपये और स्कॉर्पियो गाड़ी देने का वादा किया था. शम्शुल ने बृजकिशोर के जरिए 3-3 लाख रुपये एडवांस भेजे थे. दीपक और अरुण ने ट्रैक पर विस्फोटक तो प्लांट कर दिए, लेकिन आईईडी का तार नहीं जोड़ा, जिससे पूरा प्लान फेल हो गया. दोनों ने पैसे नहीं लौटाए, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई.

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नेपाल में हुई गिरफ्तारियों को लेकर जो रिपोर्ट रॉ तक पहुंच रही है उसके मुताबिक़, पाकिस्तान की आईएसआई ने 30 लाख रुपये अपने एजेंट ब्रजेश गिरी को दिए ताकि वह बिहार की  ट्रेनों में धमाके करवा सके.

 


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