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निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप पूरा भारत का मनुष्‍य को अंतरिक्ष में ले जाने का मिशन : राघवन

विजय राघवन ने कहा, ‘‘ऐसा अचानक नहीं हो रहा है और न ही हम इस मिशन को संयोग से शुरू कर रहे हैं. हम पहले से ही इस मिशन की योजना को आकार दे रहे हैं.’’

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निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप पूरा भारत का मनुष्‍य को अंतरिक्ष में ले जाने का मिशन : राघवन
नई दिल्‍ली: भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने जोर दिया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मानव सहित अंतरिक्ष अभियान को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा करेगा क्योंकि इसकी योजना कुछ वर्ष पहले से बनाई गई थी. विजय राघवन ने कहा, ‘‘ऐसा अचानक नहीं हो रहा है और न ही हम इस मिशन को संयोग से शुरू कर रहे हैं. हम पहले से ही इस मिशन की योजना को आकार दे रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इस मिशन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप पूरा करने के लिये उन्होंने (इसरो) कार्य योजना को आगे बढ़ाया है. भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलहाकार ने कहा कि अंतरिक्ष में मानवयुक्त यान भेजना आसान काम नहीं है, यह चुनौतीपूर्ण कार्य है. हालांकि इस मिशन के लिए उपयोग में आने वाली सभी तकनीकी जानकारी हमारे पास है.

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 72वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्रचीर से अपने संबोधन में कहा था कि साल 2022 तक ‘गगनयान’ के माध्यम से अंतरिक्ष में भारतीय यात्री को भेजा जाएगा. मोदी ने कहा था कि साल 2022, यानी आजादी के 75वें वर्ष में और अगर संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत ‘गगनयान’ के जरिये अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जायेगा. यह पूछे जाने पर कि कुछ वैज्ञानिकों ने गगनयान अभियान को पूरा करने में अमेरिका, रूस जैसे देशों का सहयोग लेने की सलाह दी है, विजय राघवन ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिशन की प्रकृति ही ‘गठजोड़’ स्वरूप की होती है.

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उन्होंने कहा, ‘‘रूस और अमेरिका अंतरिक्ष तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश है. ऐसे में इन देशों के साथ बातचीत स्वभाविक है.’’ गगनयान मिशन पर आने वाले वृहद खर्च के फायदे और ऐसे अभियान पर एक वर्ग की ओर से सवाल उठाने को लेकर उन्होंने कहा कि यह नया नहीं है. इसरो की पिछली सफलताओं के बीच भी ऐसे सवाल उठते रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दिनों में यह पूछा जाता था कि भारत अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने के लिये क्यों इतना निवेश कर रहा है. लेकिन इसरो को इससे काफी लाभ प्राप्त हुआ.

भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि आज हम इस अभियान से हाल के समय में होने वाले फायदे और आने वाले समय में संभावित लाभ का अनुमान लगा सकते हैं. मानव सहित अंतरिक्ष अभियान को अगर स्टार्ट अप और उद्योग से जोड़ दिया जाए तब इसमें दुनिया में श्रेष्ठ प्रौद्योगिकी अभियान बनने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि आज भारत अंतरिक्ष अभियान में उपयोग किये जाने वाले इलेक्ट्रानिक पुर्जो एवं सामग्रियों का आयात करता है. हम इस प्रस्तावित गगनयान अभियान के अवसर का उपयोग स्थानीय उद्योग और विज्ञान को आगे बढ़ाने में कर सकते हैं.

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मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान की बड़ी चुनौती अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने और जरूरी सहयोग प्रणाली तैयार करने के सवाल पर राघवन ने कहा कि प्रशिक्षण जरूरी तत्व हैं क्योंकि इससे विषम परिस्थितयों में मानवीय मनोविज्ञान की हमारी समक्ष को बेहतर बनाने में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि मानव सहित अंतरिक्ष अभियान का कार्य देश को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाएगा और युवा पीढ़ी इससे प्रेरित होगी तथा हर भारतीय इस पर गर्व कर सकेगा.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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