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बोफोर्स पर हर्शमैन के साक्षात्कार में उठाए मुद्दों की होगी जांच: सीबीआई

सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने बुधवार को कहा कि वह माइकल हर्शमैन के साक्षात्कार में उल्लेख किए गए तथ्यों तथा परिस्थितियों पर छानबीन करेगी.

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बोफोर्स पर हर्शमैन के साक्षात्कार में उठाए मुद्दों की होगी जांच: सीबीआई

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. बोफोर्स पर हर्शमैन के साक्षात्कार में उठाए मुद्दों की होगी जांच: सीबीआई
  2. बोफोर्स के आरोप ने 1989 में भूचाल खड़ा कर दिया था
  3. राजीव गांधी की सरकार गिर गई थी
नई दिल्ली: सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने बुधवार को कहा कि वह माइकल हर्शमैन के साक्षात्कार में उल्लेख किए गए तथ्यों तथा परिस्थितियों पर छानबीन करेगी, जो भारत सरकार द्वारा तैनात फेयरफैक्स समूह के पहले गुप्त बोफोर्स जांचकर्ता हैं. सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने एक बयान में कहा, "एजेंसी ने कुछ टीवी चैनलों पर प्रसारित माइकल हर्शमैन के साक्षात्कार का संज्ञान लिया है. इसमें बताए गए तथ्यों और परिस्थितियों पर सीबीआई अपनी उचित प्रक्रिया के मुताबिक जांच करेगी."

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केंद्रीय जांच ब्यूरो ने यह कदम रिपल्बिक टीवी पर प्रसारित हर्शमैन के साक्षात्कार के एक दिन बाद उठाया है, जहां उन्होंने बोफोर्स से संबंधित कई खुलासे किए और साल 1986 में राजीव गांधी की अगुवाई वाली सरकार और स्वीडन की कंपनी बोफोर्स के बीच हुए सौदे में कई शक्तिशाली नेताओं के नाम का भी उल्लेख किया. यह सौदा 410 हॉविट्जर्स का था, जो 1986 के मार्च में पूरा हुआ. 

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बोफोर्स सौदे में कथित भ्रष्टाचार के आरोप ने 1989 में भूचाल खड़ा कर दिया था, जिससे राजीव गांधी की सरकार गिर गई. इस सौदे में दलाली के आरोप लगाए गए, लेकिन कोई सबूत नहीं मिला. साल 1986 में तत्कालीन वित्त मंत्री वी. पी. सिंह ने जांच के आदेश दिए. ऐसा करने के लिए सिंह निजी जांच एजेंसी फेयरफैक्स समूह के संपर्क में आए. 

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हर्शमैन ने सबसे पहले बोफोर्स के दस्तावेज जुटाए थे. वह फेयरफैक्स समूह का गुप्त जांचकर्ता था, जिसकी तैनाती भारत सरकार ने की थी. अब, बीजू जनता दल के सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय लोक लेखा समिति की उपसमिति का गठन किया गया है, जो इस सौदे के बारे में नियंत्रक और महालेखापरीक्षक की 1986 की रिपोर्ट के कुछ पहलुओं के पालन नहीं करने के मामले को देखेगी.


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