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संस्कृत पढ़ाने वाले मुस्लिम प्रोफेसर का विरोध करना सरासर मूर्खता : सुशील मोदी

आरएसएस से जुड़ी संस्था संस्कृत भारती ने किया सवाल, मुसलमान के संस्कृत साहित्य पढ़ाने में गलत क्या है?

संस्कृत पढ़ाने वाले मुस्लिम प्रोफेसर का विरोध करना सरासर मूर्खता : सुशील मोदी

बीएचयू में नियुक्त हुए संस्कृत के सहायक प्राध्यापक डॉ फिरोज खान.

खास बातें

  • मोदी ने कहा- यूनिवर्सिटी को इस तरह के आंदोलन के आगे नहीं झुकना चाहिए
  • मुस्लिम या ईसाई संस्कृत में रुचि दिखाए तो उसका स्वागत करते हैं या विरोध?
  • इस्लाम को मानने वाले वेद-पुराण का अध्ययन-अध्यापन करें तो गर्व की बात
पटना/नई दिल्ली:

बिहार के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू के संस्कृत संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध करने की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने इस विरोध को सरासर मूर्खता करार दिया है. इसके अलावा आरएसएस से जुड़ी संस्था संस्कृत भारती ने फिरोज खान का समर्थन करते हुए सवाल किया है कि मुसलमान के संस्कृत पढ़ाने में गलत क्या है?  

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट किया है कि  ''डॉ फिरोज खान का विरोध करना सरासर मूर्खता है. वह केवल एक मुस्लिम हैं. यदि कोई मुस्लिम या ईसाई हमारे वेद, उपनिषद का अध्ययन करता है और संस्कृत में रुचि दिखाता है तो हम उसका स्वागत करते हैं या विरोध करते हैं? यूनिवर्सिटी को इस तरह के आंदोलन के आगे नहीं झुकना चाहिए. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का धर्म के आधार पर विरोध करना  दुर्भाग्यपूर्ण है.''

सुशील मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि ''यदि इस्लाम के मानने वाले लोग वेद-पुराण का अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं, तो यह हमारे लिए गर्व का विषय होना चाहिए.''

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का छात्र मोर्चा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ‘संस्कृत विद्या धर्म संकाय' में डॉ खान की नियुक्ति का विरोध कर रहा है लेकिन दूसरी तरफ  आरएसएस से ही जुड़ी संस्था संस्कृत भारती ने बीएचयू के संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर फिरोज खान का समर्थन किया है. संस्कृत भारती ने सवाल किया है कि मुसलमान के संस्कृत पढ़ाने में गलत क्या है?  

बीएचयू में अब संस्कृत संकाय के प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में उतरे दो छात्र संगठन

बीएचयू ने फिरोज खान का समर्थन किया है, लेकिन वे अब तक कोई कक्षा नहीं ले सके हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में सिर्फ हिन्दू ही संस्कृत पढ़ा सकते हैं.

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गौरतलब है कि संस्कृत भारती पूरी दुनिया को संस्कृत भाषा सिखाने में जुटी है और अरब देशों में भी सक्रिय है. संस्था ने कहा है कि उसके साथ जुड़े लोगों को ‘पाठयेम संस्कृतं जगति सर्व मानवान', यानी दुनिया के सभी मानवों को संस्कृत की शिक्षा देनी है.

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संस्कृत भारती ने एक बयान में कहा है कि ‘डॉक्टर फिरोज खान उन हजारों लोगों में से हैं जिन्हें हमने प्रशिक्षित किया है.' संस्कृत भारती ने कहा है कि ‘‘एक मुसलमान के साहित्य पढ़ाने में क्या गलत है?'' संगठन ने फिरोज खान से अनुरोध किया है कि वे निडर होकर विश्वविद्यालय को अपना योगदान दें. संस्था ने छात्रों से विरोध नहीं करने का अनुरोध किया है. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने शुक्रवार को अपना धरना समाप्त कर दिया है.

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(इनपुट भाषा से भी)