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झारखंड : बच्चा चोरी की अफवाह के बाद 6 हत्याओं के मामले प्रत्यक्षदर्शी ने किया ये खुलासा

कुछ लोगों का तो यह भी आरोप है कि वहां मौजूद कुछ पुलिसवाले तो ये कहते भी नज़र आए कि अगर ये बच्चा चोर हैं तो इन्हें मारो. 

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खास बातें

  1. प्रशासन के लोगों ने नहीं दिखाई सख्ती
  2. भीड़ आई और हमें खींचते हुए ले गई
  3. मेरे भी सिर में चोट आई है
रांची: झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाह के बाद जमशेदपुर और सरायकेला में पीट-पीटकर छह लोगों की हत्या के मामले में अब पुलिस और प्रशासन सवालों के घेरे में हैं. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वहां मौजूद पुलिस और प्रशासन के लोग अगर थोड़ी सख़्ती दिखाते तो सभी लोगों की जान बच सकती थी. कुछ लोगों का तो यह भी आरोप है कि वहां मौजूद कुछ पुलिसवाले तो ये कहते भी नज़र आए कि अगर ये बच्चा चोर हैं तो इन्हें मारो. 

इधर, झारखंड सरकार के मंत्री और बीजेपी विधायक सरयू राय इस मामले में अपनी सरकार का बचाव तो कर रहे हैं लेकिन NDTV से बातचीत में उन्होंने प्रशासन से चूक होने की बात मानी. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली है और अब तक 18 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. साथ ही सोशल मीडिया पर ऐसी अफ़वाह फैलानेवाले लोगों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है. झारखंड के गृहसचिव ने कहा है कि प्रशासन इन मामलों में सख्त कार्रवाई करेगा.  गृहसचिव ने कहा कि हालात अब सामान्य हैं. पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया गया है.

सराएकेला के शोभापुर गांव में जहां चार लोगों की हत्या की गई, उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी मुर्तज़ा से NDTV संवाददाता मनीष कुमार ने बात की. जो लोग मारे गए वो मुर्तज़ा के परिवार से ही जुड़े थे और उसके घर में छिपे हुए थे.मुर्तज़ा के घर से इन लोगों को खींचकर निकाला गया और हत्या कर दी गई.

उन्होंने बताया कि 4 बजे एक गाड़ी आई, जिसमें मेरा रिलेटिव अब्दुल हलीम था. मैं नमाज पढ़कर घर गया. कुछ समय बाद 100-150 लोगों की भीड़ आई. वो हम लोगों से पूछने लगे कि ये बच्चा चोर की गाड़ी है क्या. मैंने कहा कि कोई ऐसी बात नहीं है. वो बोले कि इन्हें हमको सौंप दो, लेकिन हमने मना कर दिया. कुछ देर के बाद बहुत बड़ा समूह आया. वो सब हमें खींचते हुए और घसीटते हुए ले गए. थाना प्रभारी ने काफी कोशिश की, लेकिन उनको भी पीटा गया और मेरे ऊपर भी हमला हुआ. सिर में चोट आई है. हमारे रिश्तेदार डरकर भागने लगे. सबने उन्हें पकड़कर मार दिया. उनकी गाड़ी को तोड़कर जला दिया गया. एसपी तक खबर गई थी.डीएसपी ने जब आकर एक्शन लिया तो पब्लिक भाग गई, लाठीचार्ज हुआ. प्रशासन को आने में देरी हो गई, अगर समय से आते तो चारों बच जाते.


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