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झारखंड चुनाव : बीजेपी में बगावत, मुख्यमंत्री रघुबर दास का मुकाबला सरयू राय से होगा

मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी सीट पर चुनाव लड़ेंगे मंत्री सरयू राय, पुरानी सीट जमशेदपुर पश्चिम से भी मैदान में उतरेंगे

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झारखंड चुनाव : बीजेपी में बगावत, मुख्यमंत्री रघुबर दास का मुकाबला सरयू राय से होगा

झारखंड में बीजेपी के बागी मंत्री सरयू राय सीएम रघुबर दास के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.

खास बातें

  1. जमशेदपुर पश्चिम सीट पर विपक्षी दलों का समर्थन मिलने का भरोसा
  2. जमशेदपुर पूर्व से कांग्रेस प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ उम्मीदवार
  3. रघुबर दास और अमित शाह दोनों नहीं चाहते थे राय को टिकट देना
रांची:

झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले यहां राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है. झारखंड के मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सरयू राय बागी हो गए हैं. रविवार को जमशेदपुर में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी सीट पर और अपनी पुरानी सीट जमशेदपुर पश्चिम से भी चुनाव लड़ने की घोषणा की. सरयू राय ने कहा कि जमशेदपुर पूर्वी से जहां वे खुद सक्रिय होकर प्रचार अभियान की कमान संभालेंगे वहीं जमशेदपुर पश्चिम सीट पर यह जिम्मा कार्यकर्ताओं पर होगा.

इससे पूर्व राय ने शनिवार को पार्टी नेतृत्व को उनके नाम पर विचार न करने की सलाह दी थी. राय ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि उनकी उम्मीदवारी को कम से कम जमशेदपुर पश्चिम सीट पर विपक्षी दलों का समर्थन मिलेगा. राय के बागी होने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि पार्टी जल्द अपने अधिकारिक प्रत्याशी का ऐलान करेगी.


निश्चित रूप से जमशेदपुर पश्चिम से दो बार विधायक रहे सरयू राय के बगल के विधानसभा क्षेत्र के चुनाव मैदान में कूदने के बाद मुकाबला रोचक हो गया है. लेकिन यह टक्कर कांटे की होगी या केवल प्रचार तक सीमित रह जाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अन्य दल, खासकर झारखंड मुक्ति मोर्चा और AJSU उन्हें समर्थन देते हैं या नहीं. फिलहाल राय ने हेमंत सोरेन की तारीफ करके राजनीतिक पहल झरूर की है. हालांकि जमशेदपुर पूर्वी सीट पर कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है.

सरयू राय ने हेमंत सोरेन की तारीफ़ कर भाजपा को अपने ख़िलाफ़ कारवाई करने की चुनौती दी

झारखंड की राजनीति में यह पहली बार होगा जब मंत्रिमंडल के मुखिया यानी कि मुख्यमंत्री को चुनौती उन्हीं के कैबिनेट मंत्री देंगे. राय को टिकट मिलना इसलिए भी मुश्किल लग रहा था क्योंकि मुख्यमंत्री रघुबर दास किसी भी तरह से उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में नहीं थे. पार्टी उम्मीदवारी के लिए केंद्रीय बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, जो पहले से राय से कई कारणों से खफा चल रहे थे, ने भी टिकट काटने को सही ठहराया था.

क्‍या नीतीश कुमार से मित्रता की वजह से झारखंड के वरिष्‍ठ मंत्री सरयू राय को अमित शाह ने नहीं दिया टिकट?

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