झारखंड: चुनाव आयुक्त के इस बयान का इस्तेमाल CM रघुवर दास को घेरने के लिए कर रहा है विपक्ष

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा का चुनाव में 'नक्सल समस्या पर काबू पाने का दावा' शायद अब चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाएगा.

झारखंड: चुनाव आयुक्त के इस बयान का इस्तेमाल CM रघुवर दास को घेरने के लिए कर रहा है विपक्ष

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रांची:

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा का चुनाव में 'नक्सल समस्या पर काबू पाने का दावा' शायद अब चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाएगा. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने झारखंड चुनाव के 5 चरणों में चुनाव कराने के पीछे ये तर्क दिया कि वहां 81 विधानसभा सीटों में से 67 न केवल नक्सल प्रभावित हैं बल्कि 19 अति नक्सल प्रभावित हैं. ऐसे में विपक्ष के एक दिन चुनाव कराने को मांग को नहीं माना जा सकता. झारखंड में चुनावों से पहले विपक्ष को रघुवर सरकार के खिलाफ बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि झूठ बोलने की भी एक सीमा होती है.

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वहीं झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष रामेश्वर उरांव का कहना है कि हमारी पार्टी पहले से मानती आई हैं कि ज़मीन पर कोई काम ना होने के कारण इस राज्य की सभी समस्याएं बरक़रार हैं. उनका कहना हैं कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने ये मजबूरी दिखाई है तो राज्य सरकार के आला अधिकारियो ने ही उन्हें ब्रीफ किया होगा. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उरांव ने कहा कि भाजपा के नेता यह मान चुके हैं कि ये मुद्दा उनके हाथ से निकल गया हैं.

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बता दें कि, झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2020 को पूरा हो रहा है, उससे पहले नई सरकार का गठन किया जाएगा. पिछली बार झारखंड में पांच चरणों में चुनाव हुए थे. 81 सदस्यों की विधानसभा में बीजेपी आजसू गठबंधन ने 42 सीटें जीती थीं. बीजेपी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 37 सीटें जीती थीं. जबकि उसके सहयोगी आजसू ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था और पांच सीटें जीती थीं.

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