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आईआईएम में दाखिला लेकर चुनावी वादे पूरा करना सीख रहे हैं झारखंड के मंत्री

झारखंड के मंत्री सीपी सिंह ने बताया कि आईआईएम अहमदाबाद में इस कार्यक्रम से 'हमें चुनाव पूर्व वादों को पूरा करने में मदद मिलेगी...'

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आईआईएम में दाखिला लेकर चुनावी वादे पूरा करना सीख रहे हैं झारखंड के मंत्री

झारखंड के कुछ मंत्री आईआईएम अहमदाबाद में प्रबंधन और नेतृत्व के पाठ पढ़ रहे हैं...

खास बातें

  1. झारखंड के नौ मंत्री आईआईएम-ए में प्रबंधन और नेतृत्व का पाठ पढ़ रहे हैं
  2. उनका कहना है, इससे चुनावी वादों को पूरा करने में मदद मिलेगी
  3. मंत्री ने कहा, झारखंड की जनता बीजेपी सरकार से 'चमत्कार' चाहती है
अहमदाबाद: झारखंड के नौ मंत्रियों का एक समूह भारतीय प्रबंधन संस्थान (अहमदाबाद) में प्रबंधन और नेतृत्व का पाठ पढ़ रहे हैं, और उनका कहना है कि इससे उन्हें चुनाव पूर्व किए गये वादों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

प्रोफेसर अरविंद सहाय ने बताया कि मंत्रियों का तीन-दिवसीय अध्ययन दौरा सोमवार से शुरू हुआ. इस दौरान आईआईएम-ए के संकाय सदस्य उन्हें नेतृत्व और नैतिकता, सहकारी आंदोलन, स्वास्थ्य संबंधी देखरेख, शिक्षा और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के बारे में संवाद सत्रों के ज़रिये जानकारी दे रहे हैं.

'बेहतर प्रशासन के लिए प्रबंधन एवं नेतृत्व' कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले झारखंड के मंत्रियों में रामचंद्र चंद्रवंशी, नीरा यादव, सीपी सिंह, निकांत सिंह मुंडा, सरयू राय, राज पालीवाल, लुइस मरांडी, अमर कुमार बाउरी और सीपी चौधरी शामिल हैं.

सीपी सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि कार्यक्रम से 'हमें चुनाव पूर्व वादों को पूरा करने में मदद मिलेगी...' उन्होंने बताया, "हम चुनाव से पहले बहुत सारे वादे करते हैं, लेकिन हम सत्ता में आने के बाद प्राथमिकताएं तय करते हैं, क्योंकि संसाधन सीमित हैं... ऐसे में इस तरह का शैक्षणिक कार्यक्रम हमें नई चीज़ें सीखने में मदद करेगा और हम अपने वादे पूरे करने के लिए प्रभावी नीतियां तैयार कर सकेंगे..."

मंत्री ने कहा कि झारखंड की जनता करीब ढाई साल पूर्व सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार से कुछ 'चमत्कार' चाहती है. उन्होंने कहा, "हम पूर्व की किसी भी सरकार के मुकाबले बेहतर कर रहे हैं... पूर्व में लोगों को राज्य सरकार से कोई उम्मीद नहीं होती थी, लेकिन अब वे हमसे कुछ 'चमत्कार' की उम्मीद कर रहे हैं... इस तरह की मांग स्पष्ट रूप से बीजेपी के राज्य और केंद्र में सत्ता में रहने के कारण हैं..."

(इनपुट भाषा से भी)


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