सुदेश महतो को झारखंड आंदोलन ने बना दिया जन-जन का नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और खिलाड़ी भी

झारखंड राज्य बनने पर सुदेश महतो ने पहला चुनाव सन 2000 में लड़ा था और तब वे महज 25 साल के थे

सुदेश महतो को झारखंड आंदोलन ने बना दिया जन-जन का नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और खिलाड़ी भी

झारखंड के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो.

नई दिल्ली:

झारखंड के राजनीतिक दल ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के प्रमुख सुदेश महतो और उनकी पार्टी राज्य के मौजूदा विधानसभा चुनाव में बगैर बीजेपी के समर्थन के मैदान में उतरी है. इससे पहले सुदेश महतो को पहले निरंतर बीजेपी का समर्थन मिलता रहा और पिछले चुनाव में उन्होंने बीजेपी से गठबंधन किया था.

उप मुख्यमंत्री रह चुके सुदेश महतो ने पहला चुनाव सन 2000 में लड़ा था और तब वे महज 25 साल के थे. तब झारखंड राज्य बना था और सुदेश को सड़क निर्माण मंत्री बनाया गया था. सुदेश महतो 29 दिसंबर 2009 को झारखंड के उप मुख्यमंत्री बने. तब उन्हें एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने यूथ आइकॉन ऑफ इंडिया घोषित किया था. सुदेश महतो सन 2000, 2005 और 2009 में  सिल्ली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. सिल्ली क्षेत्र के इस जन प्रतिनिधि के प्रति इस इलाके के लोगों में काफी सम्मान है. लोग उन्हें 'दादा' कहते हैं.  

सुदेश महतो में नेतृत्व का विकास पृथक झारखंड आंदोलन से हुआ. इस आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के चलते उनसे लोगों आत्मीय लगाव बना. झारखंड की ऐतिहासिक पहचान कायम रखने के लिए उन्होंने कुछ ही अरसे पहले बिरसा मुंडा और कोयलांचल के सामाजिक कार्यकर्ता व झारखंड आंदोलन के नेता स्वर्गीय बिपिन बिहारी महतो की प्रतिमाएं स्थापित करने की पहल शुरू की.   

सुदेश महतो जब पहली बार विधायक बने थे तब वे सिल्‍ली कॉलेज से इंटर पास थे. साल 2011 में उन्‍होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से बीए पास किया और साल 2013 में उन्‍होंने एमए किया. सुदेश महतो की पत्‍नी नेहा महतो बिजनेस करती हैं.

सुदेश महतो एक सामजिक कार्यकर्ता और नेता के साथ-साथ खिलाड़ी भी हैं. वे नियमित रूप से फुटबाल खेलते हैं. इसके अलावा वे सिल्ली में बिरसा मुंडा आर्चरी अकादमी भी चलाते हैं. इस अकादमी को सन 2016 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है. इसके अलावा इस अकादमी की खिलाड़ी मधुमिता कुमारी एशियाड आलम्पिक में भारत के लिए रजत पदक हासिल कर चुकी हैं.

झारखंड के 2019 के चुनाव में यह पहली बार होगा जब सुदेश महतो का आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और बीजेपी अलग-अलग विधानसभा चुनाव लड़ेगी. सन 2000 में झारखंड नया राज्य बना तब भारतीय जनता पार्टी और आजसू गठबंधन एक साथ आए थे. उस समय सुदेश महतो अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक थे, लेकिन उन्हें एक साथ कई मंत्रालय मिले थे. सन 2005 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 63 सीटों पर लड़ी थी और तीस सीटें जीतने में कामयाब हुई थी. वहीं आजसू 40 सीटों पर लड़ी और जीती मात्र दो सीटों पर. इस चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष हुआ था. चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था.

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सन 2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 67 सीटों पर लड़ी थी और 18 सीटें जीतीं थीं. आजसू 54 सीटों पर लड़ी थी और पांच सीटें जीत सकी थी. इसके बाद के साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 72 सीटों पर लड़ी और उसने 37 सीटों पर जीत हासिल की.आजसू आठ सीटों पर लड़ी और पांच सीटें जीतीं. सन 2014 के चुनाव में ही सुदेश महतो ने बीजेपी से गठबंधन किया था. इससे पहले के चुनावों में उनका और बीजेपी का दोस्ताना संघर्ष होता रहा था.

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