JNU ने हॉस्टल मैन्युअल को लेकर बनाई हाई लेवल कमिटी, छात्रों ने बताया 'कॉलेज का नाटक', हड़ताल जारी

छात्रों के सड़कों पर आक्रोश के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मामला सुलझाने को लेकर तीन सदस्यीय हाई पॉवर कमिटी बनाई है.

JNU ने हॉस्टल मैन्युअल को लेकर बनाई हाई लेवल कमिटी, छात्रों ने बताया 'कॉलेज का नाटक', हड़ताल जारी

हॉस्टल मेन्युअल को लेकर हाई पावर कमिटी की रिपोर्ट से पहले कॉलेज प्रशासन ने बनाई हाई लेवल कमिटी

नई दिल्ली:

जेएनयू (JNU) में चल रहे गतिरोध को खत्म करने को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Human Resource Development Ministry) ने एक हाई पावर कमिटी का गठन किया है लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट आई नहीं है और इससे पहले ही प्रशासन ने आनन फानन में हॉस्टल मैन्युअल को लेकर हाई लेवल कमिटी बना ली है. जेएनयू में इस कमिटी की एक बैठक भी हो गई है और कुछ बदलाव भी सुझाए गए हैं लेकिन सवाल यह है कि एक कमिटी से पहले दूसरी कमिटी बनाने की होड़ क्यों है? छात्रों को अभी भी कोई रियायत नहीं दी गई है और वो नए हॉस्टल मैन्युअल से पूरी तरह से राहत पर अड़े हुए हैं. 

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बता दें, जोरबाग के पास जेएनयू के छात्रों पर लाठी चार्ज किया गया था. इसमें कई घायल भी हुए थे. छात्रों के सड़कों पर आक्रोश के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मामला सुलझाने को लेकर तीन सदस्यीय हाई पॉवर कमिटी बनाई है पर हाई पावर कमिटी की रिपोर्ट से पहले जेएनयू प्रशासन ने हाई लेवल कमिटी बनाई और हॉस्टल मैन्युअल को लेकर सिफारिश दे दी.

इसमें नए हॉस्टल मैन्युअल में यूटिलिटी और सर्विस चार्ज को 2000 रु से घटाकर 1000 रु करने का प्रावधान है. साथ ही बीपीएल परिवार के छात्रों को इसके लिए 500 रु ही देने होंगे. हालांकि, पुराने हॉस्टल मैन्युअल में यूटिलिटी और सर्विस चार्ज जैसे प्रावधान नहीं थे.

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने साफ कर दिया है कि यह हड़ताल जारी रहेगी. हम तभी मानेंगे जब नया हॉस्टल मैन्युअल पूरी तरह से वापस लिया जाएगा. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन महीनेभर से कोई कदम नहीं उठा रहा था और अब अचानक से एक कमिटी बना दी, जब MHRD की तीन सदस्यीय कमिटी को रिपोर्ट देनी थी.

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उधर छात्र संघ के अलावा प्रशासन की गठित हाई लेवल कमिटी पर जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन को भी एतराज़ है. जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. डीके लोबियाल ने साफ कहा कि यहां बिना बातचीत के ये बार्गेनिंग नहीं चलेगी. ऐसा कॉपोरेट में भी नहीं होता है और यह तो यूनिवर्सिटी है. यहां फैसले को बंद कमरे में कुछ लोगों के जरिए नहीं, एक सिस्टम के तहत लिया जाना चाहिए. वीसी को समझना होगा कि बिना बातचीत के हालात नहीं सुधर सकते. ज़रूरत सबकी सहभागिता से फैसला लेने की है न की खुद के फैसले थोपने की.

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