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JNU देशद्रोह मामल: आठ महीने बाद भी चार्जशीट को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई दिल्ली सरकार

आठ महीने पहले ही दिल्ली पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर दिल्ली सरकार ने इसे देखने की बात कही और कहा कि इस चार्जशीट में कई ऐसे आरोप लगाए गए हैं जिनपर विचार होना जरूरी है.

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JNU देशद्रोह मामल: आठ महीने बाद भी चार्जशीट को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई दिल्ली सरकार

जेएनयू मामले की चार्जशीट पर अब तक दिल्ली सरकार ने नहीं लिया कोई फैसला

नई दिल्ली:

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए जाने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी इस मामले में अभी तक चार्जशीट फाइल नहीं हो पाई है. दरअसल, दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार की गई चार्जशीट पर दिल्ली सरकार विचार कर रही है. आठ महीने पहले ही दिल्ली पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर दिल्ली सरकार ने इसे देखने की बात कही और कहा कि इस चार्जशीट में कई ऐसे आरोप लगाए गए हैं जिनपर विचार होना जरूरी है. और हमें इसे पढ़ने के लिए समय चाहिए. अब इस मामले में बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया  कि गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास फ़ाइल है और इस मामले पर अभी विचार चल रहा है'.

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दिल्ली सरकार के इस जवाब के बाद अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि इतने महीने हो गए हैं और दिल्ली सरकार ने अभी तक इस पर अपना जवाब दायर नहीं किया है. गौरतलब है कि 9 फरवरी 2016 को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए गए थे. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 3 साल का समय लगाने के बाद 14 जनवरी 2019 को चार्जशीट दाखिल की थी. इस पूरे मामले में उस समय के जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत 10 छात्रों पर देशद्रोह का आरोप है.

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बता दें कि सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए देशद्रोह के आरोप पर दिल्ली सरकार की मंजूरी लेने के लिए कहा था. दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि 14 जनवरी 2019 को ही दिल्ली सरकार से देशद्रोह मामले में इजाजत मांगी गई थी. इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट बुधवार दोपहर 3 बजे अपना आदेश जारी करेगी. आपको बता दें कि किसी व्यक्ति पर देशद्रोह का केस चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत होती है. अगर दिल्ली सरकार ने इस मामले में मंजूरी नहीं दी तो आरोपियों पर देशद्रोह के आरोप में केस नहीं चल सकता. हालांकि पुलिस चाहे तो अदालत में सरकार के फ़ैसले को चुनौती दे सकती है.



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