लोकसभा उपचुनाव: कैराना बना जातियों का अखाड़ा, सभी पार्टियों ने झोंकी पूरी ताकत

कर्नाटक की हार के बाद कैराना का उपचुनाव बीजेपी के लिए और भी अहम हो गया है.

लोकसभा उपचुनाव: कैराना बना जातियों का अखाड़ा, सभी पार्टियों ने झोंकी पूरी ताकत

जयंत चौधरी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

कर्नाटक की हार के बाद कैराना का उपचुनाव बीजेपी के लिए और भी अहम हो गया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद यहां चुनावी रैली की और कमान को संभाल लिया है. उधर सपा-बसपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन भी इस उपचुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए हैं. 63 साल के बीएसपी कार्यकरत्ता राजेंद्र पाल सिहं, जो खुद को साझा विपक्ष का स्टार कैंपेनर बताते हैं, उनका कहना है कि चुनाव में 75 फीसदी वोट हैंड पंप को मिलेगा. 
 

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साझा विपक्ष की मदद की लड़ रही उम्मीदवार तबस्सुम बेगम पूर्व बीएसपी सांसद की पत्नी हैं और सपा से जुड़ी हैं. लेकिन वो राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर लड़ रही हैं. उन्हें समर्थन देने के लिये बीएसपी और कांग्रेस ने अफने उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे हैं. कैराना में कुल 17 लाख वोटर हैं.  जिसमें मुस्लिमों की संख्या 5 लाख है और जाटों की संख्या 2 लाख है वहीं, दलितों की संख्या 2 लाख है और ओबीसी की संख्या दो लाख है, जिनमें गूजर, कश्यप और प्रजापति शामिल हैं. 

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योजना लोकदल के पारंपरिक जाट वोटों के साथ ही मुस्लिम वोटों को अपने साथ लेने की है. दूसरी पार्टियों के वोट बैंक के सहारे तब्बसुम की जीत की उम्मीदद विपक्ष कर रहा है. लेकिन शामली और मुज़फ्फरनगर की हाल की हिंसा के बाद क्या जाट वोटर एक मुस्लिम उम्मीदवार को वोट देंगे. इस बीच लोकदल ने अपना चुनावी नारा बदल लिया है. अब जय जवान जय किसान की जगह..वो कह रहे हैं..जिन्ना नहीं गन्ना चलेगा. अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना के फोटो को लेकर हाल के विवाद के बाद ये बदलाव आया है. 

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बीजेपी को पता है कि ये लड़ाई आसान नहीं है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यहां बीजेपी की उम्मीदवार मृगंका सिंह के लिए अपनी पहली चुनावी रैली की. योगी आदित्यनाथ के चुनाव क्षेत्र गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के फूलपुर में बीजेपी की हार के बाद कैराना का चुनाव बीजेपी के लिये बहुत ही अहम हो गया है. 

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