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ED ने कहा- जांच में सहयोग नहीं कर रहे कार्ति चिदंबरम तो SC बोला- हमें बताओ आपको कब पूछताछ करनी है

कार्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर कार्ति जांच से बचने की कोशिश करते हैं तो टेनिस के लिए विदेश जाने की इजाजत नहीं मिलेगी.

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ED ने कहा- जांच में सहयोग नहीं कर रहे कार्ति चिदंबरम तो SC बोला- हमें बताओ आपको कब पूछताछ करनी है

कार्ति चिदंबरम (फाइल तस्वीर)

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार कोकार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने विदेश जाने की इजाजत मांगी थी. इस पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया और चिदंबरम की याचिका का विरोध किया. ईडी ने कहा कि कार्ति चिदंबरम जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, अगर वह बाहर जाते हैं तो इससे मामले की जांच में देरी होगी. बता दें, INX मीडिया मामलेमें CBI के रेड कॉर्नर नोटिस के चलते कार्ति को हर बार विदेश जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त लेनी पड़ती है. 

कार्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर कार्ति जांच से बचने की कोशिश करते हैं तो टेनिस के लिए विदेश जाने की इजाजत नहीं मिलेगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से कहा कि 'वो सुप्रीम कोर्ट में वो तारीख बताए, जिस दिन पूछताछ के लिए कार्ति की जरूरत है. कोर्ट ये सुनिश्चित करेगा कि कार्ति जांच में भी सहयोग करे और विदेश भी जा सके.' सुप्रीम कोर्ट ने इन तारीखों का ब्योरा देने के लिए बुधवार तक का समय दिया और साथ ही कहा है कि इस मामले की सुनवाई 30 जनवरी को की जाएगी.


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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में ईडी ने कहा है, 'कार्ति 6 महीने में 51 दिन विदेश में रहे. वह अपनी आजादी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. INX और एयरसेल मैक्सिस मामले में जांच पूरी करने के लिए कार्ति से पूछताछ जरूरी है. कार्ति को विदेश जाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.' बता दें, फरवरी-मार्च के बीच यूके, स्पेन, जर्मनी और फ्रांस जाने के लिए कार्ति की याचिका पर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है.

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बता दें, हालही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस बात पर जोर दिया कि आईएनएक्स मीडिया मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है क्योंकि वह जवाब देने में टाल मटोल कर रहे हैं. दोनों जांच एजेंसियों ने दलील दी कि चिदंबरम जब वित्त मंत्री थी, उस दौरान एफआईपीबी ने एक मीडिया समूह को विदेश से 305 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त करने के लिए मंजूरी प्रदान की थी. एजेंसियों ने कहा कि चिदंबरम ने गलत जवाब दिए और अपनी जानकारी का खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा कि एजेंसियों को उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है जो गुणात्मक रूप से भिन्न होगी.

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सीबीआई और ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि एजेंसियां ​​उन्हें गिरफ्तार करने, संबंधित अदालत के सामने पेश करने और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर लेने के लिए अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करने की अनुमति मांग रही है. उन्होंने कहा कि वह टालमटोल कर रहे हैं और दिए गए उत्तर तथ्यात्मक रूप से गलत हैं. न्याय के उद्देश्य के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ की जरूरत है.

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